मुंगेली/फास्टरपुर। आरएसएलडी बायोफुल्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी पंजाब के एक बड़े उद्योगपति के मालिकाना हक़ की कंपनी है जो मुंगेली जिले के फास्टरपुर इलाके के सिल्ली ग्रामपंचायत के आश्रित गांव नवा गांव कैथ में 600 केएलडी का डिस्टलरी, इथेनॉल फैक्ट्री व शुगर फैक्ट्री के साथ पॉवर प्लांट लगाने का कार्य करने जा रही है, जिसका विगत चार महिने से आसपास के दस ग्राम पंचायतों के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के अलावा विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के लोग विरोध करते आ रहं है । पंचायत के प्रतिनिधियों का कहना है कि इस अंचल में पेयजल की विकराल समस्या हर वर्ष मार्च माह से प्रारंभ हो जाता है। गर्मी के दिनों में तो हाहाकार मच जाता है। इन फैक्ट्री के संचालन व उत्पादन में करोड़ों घन लीटर पानी की जरूरत पड़ेगी और इस समूचे क्षेत्र में न तो कोई नदी है और न ही कोई बड़ा जलाशय ऐसे में अपने जरूरत का पानी इस कंपनी द्वारा जमीन के नीचे से लिया जाएगा और आधुनिकतम टेक्नोलॉजी के माध्यम से हजार फीट जमीन के नीचे से पानी का दोहन करेंगे, जिससे आसपास के बीस से भी ज़्यादा गांव बंजर हो जायेंगे। पर्यावरण के निर्धारित मानको का पालन किये बगैर तथा कई ज्ञात तथ्यों को छिपाकर इस कंपनी ने पर्यावरण की अनुमति तो प्राप्त कर लिया है पर आज दिनांक तक उसे नोटिस चस्पा भी नहीं किया है । जिस जगह पर फैक्ट्री स्थापित होगा वह जमीन भी कंपनी के नाम रजिस्ट्री नहीं है। इन तमाम कमियों की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय राष्ट्रपति कार्यालय के साथ मुख्यमंत्री व छत्तीसगढ़ शासन के पर्यावरण मंत्री को किया गया था। मुख्यमंत्री से प्रतिनिधि मंडल ने मिलने का निवेदन किया था इस पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मंत्री ओपी चौधरी को निर्देशित किया कि वे इन प्रभावितों के साथ बैठक कर समस्याओं का निराकरण करें। इसके बाद ही मंत्री ओपी चौधरी के कार्यालय से प्रभावितों का नेतृत्व कर रहे हेमंत अहिरे, अल्फ़ाज मसीह तथा प्रशांत मसीह के पास संदेश पहुंचा कि वे पंचायत के प्रतिनिधि व विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों के साथ मंगलवार चार अगस्त को शाम चार बजे मंत्रालय के उनके विभाग के सभा कक्ष में मय दस्तावेज व साक्ष्य के साथ पहुचे । मंत्री के इस बुलावे के बाद प्रभावितों में उत्साह है और वे मान रहें हैं कि अब यह फैक्ट्री यहाँ नहीं लग सकेगी।