बिलासपुर। नवरात्र के पावन पर्व पर पांचवे दिन स्कंदमाता देवी के रूप में मां बगलामुखी देवी का पूजन किया गया। प्रतिदिन श्री शारदेश्वर पारदेश्वर महादेव का रुद्राभिषेक, श्री महाकाली, महालक्ष्मी एवं महासरस्वती देवी का श्रीसूक्त एवं षोडश मंत्रों द्वारा दूधधारा सहित अभिषेक तथा भगवान श्रीरामचंद्र जी एवं श्री सिद्धिविनायक गणेश जी का पूजन-श्रृंगार किया जा रहा हैं। पीतांबरा पीठाधीश्वर आचार्य डॉ. दिनेश महाराज ने बताया कि शारदीय नवरात्र के छठवे दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी देवी के रूप में मां श्री ब्रह्मशक्ति बगलामुखी देवी का विशेष पूजन किया जाएगा। शारदीय नवरात्र के छठवें दिन मां दुर्गा के छठवें स्वरूप मां कात्यायनी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। मां कात्यायनी को शक्ति, साहस, पराक्रम और अधर्म के विनाश की प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रसन्न होकर आदिशक्ति ने उनके घर पुत्री के रूप में अवतार लिया, जिसके कारण उनका नाम कात्यायनी पड़ा। देवी का यह स्वरूप महिषासुर जैसे दुष्ट शक्तियों के संहार और धर्म की स्थापना से जुड़ा है। मां कात्यायनी सिंह पर सवार रहती हैं और उनके हाथों में अस्त्र-शस्त्र व कमल सुशोभित हैं। उनका स्वरूप भक्तों को अन्याय के विरुद्ध खड़े होने, भय पर विजय प्राप्त करने और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। मान्यता है कि मां कात्यायनी की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से भक्तों को आत्मबल, साहस, सकारात्मक ऊर्जा और बाधाओं का सामना करने की शक्ति प्राप्त होती है। अविवाहित कन्याएं योग्य जीवनसाथी की कामना से भी मां कात्यायनी की आराधना करती हैं। मां कात्यायनी की उपासना का संदेश है कि शक्ति का उपयोग सदैव धर्म, न्याय और जनकल्याण के लिए होना चाहिए। नवरात्र में उनकी आराधना हमें अपने भीतर के भय, नकारात्मकता और दुर्बलताओं को दूर कर आत्मविश्वास के साथ जीवन में आगे बढऩे की प्रेरणा देती है।
मां कात्यायनी की आराधना से धर्म के मार्ग पर चलने की मिलती है प्रेरणा
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