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वन प्रबंधन की लापरवाही पर उठे सवाल, उच्च अधिकारियों से संज्ञान की मांग

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हनुमान अग्रवाल द्वारा 

 

बेलगहना :— बिलासपुर वन मंडल अंतर्गत स्थित वन परिक्षेत्र बेलगहना के खोगसरा सर्किल में दो वर्षीय मादा हिरण की मौत का मामला प्रकाश में आया है।

इस सम्बन्ध मे खोगसरा सर्किल में पदस्थ सहायक परिक्षेत्रअधिकारी नरेंद्र सिंह बैंसवाड़े ने बताया कि घटना 26 जुलाई की है। वन प्रबंध समिति के सदस्यों ने उन्हें दोपहर 3 बजे सूचना दी कि बाजार क्षेत्र के पास एक हिरन मृत पड़ा है। सूचना मिलते ही उच्चअधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। सूत्रों के अनुसार मृत हिरण के कूल्हे के पास व अन्य जगहों पर चोट के निशान नजर आ रहे हैं। सहायक वनपरिक्षेत्र अधिकारी के अनुसार जब वन अमला वहां पहुंचा तो देखा कि मृत हिरण के शरीर को कौवे व कुत्ते क्षति पहुंचा रहे थे। मृत हिरण के शव को कब्जे में लेकर अग्रिम कार्रवाई की जा रही है। इस संबंध में जब वन परिक्षेत्र अधिकारी श्री देव चरण मरावी से पूछा गया तो उन्होंने सिर्फ यह बताया की अग्रिम कार्रवाई की जा रही है। पोस्टमार्टम के सम्बन्ध मे पूछे जाने पर उन्होंने गोल -मोल बाते कही। यहां यह बताना लाजिमी होगा कि पशु चिकित्सालय बेलगहना में पदस्थ चिकित्सक श्री आनंद रघुवंशी अवकाश पर हैं ऐसी स्थिति में अभी तक हिरण के शव का पोस्टमार्टम नहीं हो पाया है। वन विभाग के अनुसार कानन पेंडारी में पदस्थ चिकित्सक द्वारा पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। सूत्रों के अनुसार ऐसी संभावना नजर आ रही है की हिरण का पोस्टमार्टम आज संभव नहीं हो पाएगा।इस मामले मे

आसपास के निवासियों के बयान से कुछ खुलासा होने की उम्मीद है। बहरहाल यह मामला जांच का विषय है। देखना यह है कि हिरण की मौत कुत्तों के हमले से हुई या फिर किसी शिकारी ने घटना को अंजाम दिया है। घटना के बाद वन परिक्षेत्र अधिकारी का स्थल पर नहीं पहुंचना वन्य जीवों के प्रति उनकी संवेदनहीनता को प्रदर्शित करता है। वन विभाग के उच्च अधिकारियो को इस मामले मे भी संज्ञान लेना चाहिए।

दो बातें बता रही हैं कि वन विभाग कितना संजीदा है

 

मृत हिरण के मामले में दो खबरें छनकर सामने आई है। पहली यह की हिरण का पोस्टमार्टम 26 जुलाई की जगह 27 जुलाई को होगा और दूसरी यह की हिरण की मौत एक-दो दिन पहले हुई है। वन विभाग के कार्यालय से अधिकतम एक किलोमीटर दूरी पर घटना घटित होना और घटना दिवस को वन विभाग को जानकारी नहीं मिलना घोर लापरवाही का परिचायक है साथ ही जांच का विषय भी है।

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भूपेन्द्र पाण्डेय

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