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संभाग सतरीय जल उपयोगिता समिति की बैठक संपन्न जलाशयों में जलभराव और फसलों की ताजा हालात की समीक्षा

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बिलासपुर // संभागायुक्त सुनील जैन की अध्यक्षता में संभाग स्तरीय जल उपयोगिता समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में सिंचाई जलाशयों में जलभराव एवं फसलों के ताजा हालात की समीक्षा की गई। गत वर्षों की तुलना में इस साल पर्याप्त वर्षा होने के कारण खेती किसानी के काम सुचारू रूप से चल रहे हैं। किसानों की ओर से कहीं से भी जलाशयों से कृषि कार्य के लिए पानी छोड़ने की मांग नहीं आई है। संभागायुक्त कार्यालय में आयोजित बैठक में विधायक जांजगीर श्री व्यास कश्यप, विधायक रामपुर श्री फूलसिंह राठिया, कलेक्टर संजय अग्रवाल, जल संसाधन विभाग के एसई जीडी रामटेके सहित संभाग स्तरीय अधिकारी मौजूद थे। संभाग के अन्य जिलों के कलेक्टर एवं अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के जरिए बैठक में शामिल हुये।

बैठक में बताया गया कि संभाग के सभी बड़े, मध्यम एवं लघु जलाशयों में निस्तार एवं सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में जल उपलब्ध है। मिनी माता हसदेव बांगों परियोजना में 74 प्रतिशत, खारंग जलाशय में 110 प्रतिशत, मनियारी जलाशय में 109 प्रतिशत, अरपा भैंसाझार निर्माणाधीन बैराज में 20 प्रतिशत और केलो परियोजना निर्माणाधीन में 49 प्रतिशत जलभराव है। मध्यम परियोजना के अंतर्गत घोंघा जलाशय में 102 प्रतिशत, केदार जलाशय में 75 प्रतिशत, पुटका जलाशय में 60 प्रतिशत, किंकारी जलाशय में 96 प्रतिशत और खम्हार पाकुर जलाशय में 100 प्रतिशत जल भराव है। संभाग के अंतर्गत 621 लघु जलाशय हैं। जिनमें औसत रूप से 82 प्रतिशत जल भरा हुआ है। बैठक में रबी सिंचाई वर्ष 2024-25 की उपलब्धि एवं खरीफ सिंचाई 2025-26 के लक्ष्य प्राप्ति की विस्तृत समीक्षा की गई।

श्री जैन ने बैठक में खाद, बीज की उपलब्धता एवं वितरण की भी समीक्षा की। उन्होंने स्थानीय स्तर पर किसानों के संगठन के जरिए (एफपीओ) बीज उत्पादन कार्यक्रम लिये जाने पर जोर दिया। बताया गया कि एफपीओ को बीज प्रक्रिया केन्द्र में बीज उत्पादन कार्यक्रम के लिए पंजीयन नहीं किया जाता है। कमिश्नर ने इन्हें अनुमति प्रदान करने के लिए राज्य शासन को प्रस्ताव भेजने के निर्देश संयुक्त संचालक को दिए। बैठक में चर्चा हुई यूक्रेन युद्ध के कारण पूरे देश में डीएपी की कम आपूर्ति हुई है। इनके विकल्प के रूप में अनुशंसित खाद के उपयोग के संबंध में जागरूकता एवं इनकी उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। डीएपी के विकल्प के तौर पर यूरिया, सुपरफास्फेट एवं म्यूरेट ऑफ पोटाश उपलब्ध है। विकल्प खाद के मिश्रण की कीमत लगभग डीएपी के बराबर बैठ रही है। कमिश्नर ने डबल लॉक केन्द्रों से जल्दी से जल्दी सोसायटिओं में खाद भेजने के को कहा है। उन्होंने कहा कि खेती किसानी का यह चरम समय चल रहा है। आपूर्ति में जरा भी लापरवाहीं बर्दाश्त नहीं की जायेगी। उन्होंने फसल परिवर्तन पर जोर दिया। इसके लिए हर गांव की अलग-अलग जरूरत को ध्यान में रखते हुए कार्य-योजना बनाने एवं जागरूकता के लिए जिला स्तरीय सम्मेलन आयोजित करने के निर्देश दिए है।

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भूपेन्द्र पाण्डेय

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