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रलिया भिलाई क्षेत्र में प्रस्तावित कोल वॉशरी के खिलाफ ग्रामीणों का विरो

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बिलासपुर :— छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के रलिया भिलाई क्षेत्र में अरपाकोल बेनिफिकेशन ग्रीनफील्ड लिमिटेड द्वारा प्रस्तावित 2.6 मिलियन टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) क्षमता वाली कोल वॉशरी के खिलाफ  आस पास ग्रामीणों के सरपंचों ने जोरदार विरोध जताया है। प्रभावित गांवों के निवासियों ने जिलाधीश को एक ज्ञापन सौंपकर प्रोजेक्ट की जन सुनवाई रद्द करने और इसे पूरी तरह बंद करने की मांग की है। ज्ञापन में पर्यावरण, स्वास्थ्य, कृषि और स्थानीय संसाधनों पर पड़ने वाले संभावित नकारात्मक प्रभावों को विस्तार से उल्लेख किया गया है।

 

ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि प्रस्तावित कोल वॉशरी से भिलाई, रलिया और बेलटुकरी गांवों में स्थित स्कूलों पर सीधा असर पड़ेगा, जो मात्र 500 मीटर की दूरी पर हैं। इससे छात्रों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है, विशेषकर धूल और वायु प्रदूषण के कारण। इसके अलावा, क्षेत्र में सतही जल की उपलब्धता पहले से ही सीमित है, जहां 3 किलोमीटर के दायरे में पानी की कमी है, जैसा कि बिलासपुर जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट में दर्ज है।

 

ग्रामीणों ने चिंता जताई कि कोल वॉशरी से निकलने वाली धूल और वायु प्रदूषण से स्थानीय निवासियों के फेफड़ों, आंखों और त्वचा से संबंधित बीमारियां बढ़ सकती हैं। कृषि भूमि पर कोयले की धूल और राख के प्रदूषण से खेती करना मुश्किल हो जाएगा, जिससे गांवों के पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों को लंबे समय तक नुकसान पहुंचेगा। ज्ञापन में यह भी बताया गया कि प्रस्तावित साइट से एनटीपीसी का राखड़ डैम मात्र 1 किलोमीटर दूर है, जो धूल और भारी वाहनों के कारण पहले से प्रभावित है।

 

इसके अतिरिक्त, क्षेत्र में पहले से ही जयरामनगर रेलवे साइडिंग और चार अन्य कोल वॉशरियां 2 किलोमीटर के दायरे में मौजूद हैं। 2 किलोमीटर दूर स्थित राशि पावर प्लांट और पाराघाट कोल वॉशरी के दुष्प्रभावों से स्थानीय निवासी पहले से पीड़ित हैं। ज्ञापन के अनुसार, इस प्रोजेक्ट से लगभग 70,000 से 80,000 की आबादी प्रभावित होगी, और उनके स्वास्थ्य की जिम्मेदारी कौन लेगा, यह सवाल उठाया गया है।

 

धार्मिक स्थलों पर भी खतरा मंडरा रहा है, क्योंकि राउतराय मंदिर मात्र 10 मीटर की दूरी पर है, जिसका अस्तित्व समाप्त हो सकता है। प्रस्तावित क्षेत्र में गेल इंडिया लिमिटेड की गैस पाइपलाइन 500 मीटर के दायरे में बिछी हुई है, जो किसी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। भिलाई बारहमासी नाला, सिंचाई नहर और नालियां पूरी तरह प्रभावित होंगी, जिससे किसानों को पानी की कमी का सामना करना पड़ेगा। साथ ही, कृषि भूमि का उपयोग परिवर्तन किए बिना ही औद्योगिक प्रस्ताव दिया गया है, जो नियमों का उल्लंघन है।

 

ज्ञापन सौंपने वाले ग्रामीणों ने कहा, “यह प्रोजेक्ट हमारे गांवों की जीवन रेखा को नष्ट कर देगा। हमारी मांग है कि जन सुनवाई तत्काल स्थगित की जाए और प्रोजेक्ट को बंद किया जाए।” जिलाधीश कार्यालय ने ज्ञापन प्राप्त करने की पुष्टि की है, लेकिन अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे प्रोजेक्ट्स में स्थानीय समुदाय की चिंताओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। मामले पर आगे की कार्रवाई की प्रतीक्षा की जा रही है।

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भूपेन्द्र पाण्डेय

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