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गोड़पारा आदर्श दुर्गोत्सव समिति ने 50वें स्वर्ण जयंती वर्ष पर भव्य दुर्गा प्रतिमा की स्थापना की

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बिलासपुर  // गोड़पारा की आदर्श दुर्गोत्सव समिति ने अपने 50वें स्वर्ण जयंती वर्ष में मां दुर्गा की भव्य स्थापना अरपा नदी के तट पर रिवर व्यू रोड पर की। इस अवसर पर 25 फीट ऊंची और 45 फीट चौड़ी मां दुर्गा की विशाल मूर्ति को 25,000 वर्ग फीट के भव्य पंडाल में स्थापित किया गया, जिसे कोलकाता के कारीगरों ने राजस्थानी महल की थीम पर सजाया। पंडाल में चार धाम—केदारनाथ, बद्रीनाथ, जगन्नाथपुरी और द्वारकाधाम—की झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। इसके साथ ही मां काली, भगवान शिव और नरसिंह अवतार की झांकियां भी श्रद्धालुओं को भक्ति में डुबो रही थी।

 

**3 किमी लंबी लाइटिंग और 40 फीट ऊंचा वाटर फाउंटेन**

आयोजन को भव्य बनाने के लिए 3 किलोमीटर क्षेत्र में रिवर व्यू और गोलबाजार तक आकर्षक लाइटिंग की गई। बेंगलुरु की विशेष टीम ने 1.5 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में 40 फीट ऊंचे वाटर फाउंटेन पर लेजर शो का आयोजन किया, जो हर घंटे 15 मिनट के चार सत्रों में प्रस्तुत किया गया। 

 

**10 दिवसीय नवरात्रि उत्सव में विविध आयोजन**

10 दिवसीय नवरात्रि उत्सव में प्रतिदिन रामलीला मंचन और रावण दहन का आयोजन किया गया। बच्चों के लिए मनोरंजन केंद्र और आनंद मेले की व्यवस्था की गई। लकी ड्रॉ के तहत कार, मोटरसाइकिल, इलेक्ट्रिक वाहन सहित सैकड़ों पुरस्कार रखे गए। 26 और 27 सितंबर को महिलाओं के लिए भारतीय परंपरा और परिधान में गरबा नृत्य का आयोजन हुआ।

 

**वृद्धाश्रम और मूक-बधिर बच्चों के लिए विशेष व्यवस्था**

समिति ने वृद्धाश्रम के श्रद्धालुओं और मूक-बधिर शाखा के बच्चों को माता रानी के दर्शन के लिए विशेष व्यवस्था की। सोशल मीडिया के माध्यम से आयोजन का व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया, जिसके परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु शामिल हुए।

 

**50 वर्षों की गौरवशाली परंपरा**

आदर्श दुर्गोत्सव समिति पिछले 50 वर्षों से गोड़पारा के आदर्श चौक में मां दुर्गा की स्थापना करती आ रही है। स्वर्ण जयंती के अवसर पर इस बार भव्य आयोजन के लिए अरपा नदी तट को चुना गया। कोलकाता के 100 से अधिक कारीगरों ने पंडाल को तीन बड़े हॉल के साथ सजाया, जिसमें चार धाम की झांकियों ने श्रद्धालुओं को धार्मिक अनुभूति प्रदान की।

 

यह आयोजन न केवल धार्मिक उत्साह का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक समावेश और सांस्कृतिक समृद्धि का भी उदाहरण प्रस्तुत किया।

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भूपेन्द्र पाण्डेय

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