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छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी में न्यायाधीशों के प्रशिक्षण कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ विवेकानंद सभागार में न्यायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य न्यायाधीश के करकमलों से

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बिलासपुर :— छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी, बिलासपुर के विवेकानंद सभागार में नव पदोन्नत जिला न्यायाधीश (प्रवेश स्तर) 2025 हेतुदो सप्ताह का प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारम्भ माननीय श्री न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा, मुख्य न्यायाधिपति, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय एवं मुख्य संरक्षक, छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी के गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित हुआ।

 

माननीय मुख्य न्यायाधिपति महोदय ने अपने अमूल्य विचार प्रशिक्षु न्यायाधीशों के साथ साझा किए। उन्होंने न्यायिक कार्यप्रणाली में ईमानदारी, संवेदनशीलता तथा संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता के महत्व को रेखांकित करते हुए न्यायाधीशों को सदैव विनम्रता एवं करुणा के साथ अपनेदायित्वों का निर्वहन करते हुए आजीवन विधि के विद्यार्थी बने रहनेके लिए प्रेरित किया। माननीय मुख्य न्यायाधिपति महोदय ने यह भी उल्लेख किया कि हाल के समय में छत्तीसगढ़ न्यायपालिका मे न्यायिक कार्यप्रणाली मेंमहत्वपूर्ण बदलाव हुए हैं जैसे:-ई-फाइलिंग, वर्चुअल सुनवाई एवं डिजिटल अभिलेख का प्रयोग।

 

न्यायाधीशों को केवल इन परिवर्तनों को अपनाना ही नहीं, बल्कि उदाहरण प्रस्तुत करते हुए इन नवाचारों को न्याय को अधिक सुलभ और प्रभावी बनाने हेतु समाहित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यायिक शिक्षा आजीवन चलनेवाली प्रक्रिया है और विनम्रता उसकी अनिवार्य साथी है। विधि की गरिमा एवं जनता के विश्वास को सदैव सर्वोपरि रखना चाहिए।

 

माननीय मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि जिला न्यायाधीश की भूमिका जितनी गरिमामयी है, उतनी ही चुनौतीपूर्ण भी है। जिला न्यायालय आम नागरिक और न्याय व्यवस्था के बीच पहला एवं महत्वपूर्ण संपर्क होतेहैं, अतः जिला न्यायाधीश के कंधों पर अत्यंत गहन जिम्मेदारी निहित है। जिला न्यायाधीश का पद सम्मान का प्रतीक है, परंतु इसके साथ विशाल उत्तरदायित्व भी जुड़ा हुआ है। इस चरण मेंअनुभव नज्ञान देता है, किन्तुसंगठित प्रशिक्षण उस ज्ञान को प्रभावी नेतृत्व में रूपांतरित करता है।

 

इस पाठ्यक्रम को सीखने, मनन करने और अपने अनुभव साझा करनेके भाव से खुले खु मन से ग्रहण करें । न्यायिक शिक्षा एक निरंतर यात्रा है। यह केवल पुस्तकों या पूर्व उदाहरणों तक सीमित नहीं है, बल्कि हमारे द्वारा अपनाए गए मूल्यों, प्रकरणों से निपटनेकी संवेदनशीलता तथा न्यायालय संचालन की गरिमा तक विस्तृत है। सदैव स्मरण रखेंकि आपका पद अधिकार का नहीं, बल्कि —संविधान की, न्याय की और समाज की सेवा का प्रतीक है। इस अवसर पर माननीय श्रीमती न्यायमूर्ति रजनी दुबे दु, न्यायाधीश,

 

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय एवं अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी नेभी अपनी गरिमामयी उपस्थिति सेकार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। नव पदोन्नत जिला न्यायाधीशों हेतु यह दो सप्ताह का प्रशिक्षण कार्यक्रम इस उद्देश्य से तैयार किया गया है कि उन्हेंमौलिक ज्ञान, व्यावहारिक कौशल एवं न्यायिक दृष्टिकोण सेसुसज्जित किया जा सके। पाठ्यक्रम में वस्तुनिष्ठ एवं प्रक्रियात्मक विधियों, न्यायालयों मेंप्रौद्योगिकी का उपयोग, प्रकरण प्रबंधन, आचार-संहिता एवं समाज के कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशीलता जैसेविविध विषयों को सम्मिलित किया गया है। प्रशिक्षण में न्यायालय प्रबंधन एवं वैकल्पिक विवाद समाधान प्रणाली पर भी विशेष बल दिया गया है।कार्यक्रम में रजिस्ट्रा र जनरल एवं रजिस्ट्री के अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे। स्वागत उद्बोधन छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी के निदेशक द्वारा तथा आभार प्रदर्शन अतिरिक्त निदेशक द्वारा प्रस्तुत किया गया ।

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भूपेन्द्र पाण्डेय

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