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जल संकट से आत्मनिर्भरता तक: कुमा ग्राम में सौर ऊर्जा आधारित जल आपूर्ति से बदलाव

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बिलासपुर :— रायगढ़ के धरमजयगढ़ विकासखंड का कुमा ग्राम पंचायत ग्रामीण परिवर्तन की एक सशक्त मिसाल बनकर उभरा है। जिला मुख्यालय से लगभग 100 किलोमीटर दूर बसे इस गांव में कभी पानी की समस्या जीवन का सबसे बड़ा संघर्ष थी। आज वही गांव जल जीवन मिशन के तहत स्थापित सोलर नल-जल योजना से आत्मनिर्भरता, स्वच्छता और समृद्धि की नई कहानी लिख रहा है।

 

कुछ वर्ष पहले तक ग्राम कुमा में जल संकट सामान्य बात थी। महिलाएं सुबह से लेकर दोपहर तक हैंडपंपों के पास कतार में खड़ी दिखाई देती थीं। गर्मी के दिनों में जलस्तर गिरने से स्थिति और भी गंभीर हो जाती थी। कई बार पानी के लिए दूर-दूर तक जाना पड़ता था। इस दैनिक संघर्ष ने महिलाओं का समय, श्रम और ऊर्जा छीन लिया था। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती थी और परिवार के स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर पड़ता था। गांव के जीवन की रफ्तार पानी की उपलब्धता पर निर्भर थी और यही सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई थी।

 

गांव में जल जीवन मिशन के अंतर्गत सौर ऊर्जा आधारित नल-जल प्रदाय प्रणाली स्थापित किए जाने के बाद परिवर्तन की कहानी शुरू हुई। गांव में लगाए गए सोलर पैनलों से संचालित पंप के माध्यम से जल को ऊंची टंकी तक पहुंचाया जाता है और वहां से पाइपलाइन द्वारा प्रत्येक घर तक नियमित जल आपूर्ति की जाती है। यह व्यवस्था बिजली पर निर्भर नहीं है, इसलिए बिजली की आपूर्ति बाधित होने पर भी कोई प्रभाव नहीं पड़ता। पर्यावरण के अनुकूल यह प्रणाली न्यूनतम रखरखाव में दीर्घकालिक समाधान प्रदान कर रही है।

 

कुमा में अब हर घर स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल पहुंच रहा है, जिससे गांव की जीवन शैली में स्थायी परिवर्तन आया है। गांव की श्रीमती देवमती बताती हैं कि पहले रोज दो से तीन घंटे बाहर से पानी लाने में निकल जाते थे। उस समय वे न तो बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान दे पाती थीं और न ही किसी और काम के लिए समय निकाल पाती थीं। अब घर पर ही नल से नियमित जल आपूर्ति होने से उनका जीवन पूरी तरह बदल गया है। वे अपने बच्चों की पढ़ाई-लिखाई पर अधिक समय दे रही हैं, स्वसहायता समूह की गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग ले रही हैं और सामाजिक कार्यक्रमों में भी सहभागिता बढ़ी है। स्वच्छ पेयजल मिलने से परिवार का स्वास्थ्य बेहतर हुआ है और जलजनित बीमारियों में कमी आई है। देवमती गर्व से कहती हैं, अब हमें पानी के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ता। घर पर ही स्वच्छ पानी मिलने से हमारा जीवन सरल और सुरक्षित हो गया है।

 

बाहर से पानी लाने की बाध्यता समाप्त होने से महिलाओं को समय की स्वतंत्रता मिली है। वे इस समय को अब आयवर्धक गतिविधियों और सामाजिक भागीदारी में लगा रही हैं। इससे महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे निर्णय प्रक्रिया में भी अधिक सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। यह परिवर्तन केवल सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक सम्मान और आर्थिक सुदृढ़ता की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ है। विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्रों में स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता से बच्चों की उपस्थिति और स्वास्थ्य में सुधार देखा गया है, स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ी है और घरों में शौचालय के उपयोग को भी प्रोत्साहन मिला है।

कुमा में ग्राम स्तर पर जल प्रबंधन समिति का गठन किया गया है, जो जल आपूर्ति प्रणाली के रखरखाव और निगरानी की जिम्मेदारी संभाल रही है। इससे ग्रामीणों में जिम्मेदारी और सामुदायिक सहभागिता की भावना विकसित हुई है। आज कुमा केवल एक गांव नहीं, बल्कि प्रेरणा का प्रतीक है। यहां बहता स्वच्छ जल केवल प्यास नहीं बुझा रहा, बल्कि विकास, आत्मसम्मान और उज्ज्वल भविष्य की नई धारा प्रवाहित कर रहा है।

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भूपेन्द्र पाण्डेय

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