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बिलासपुर संभाग के 8 जिलों से आए प्रकरणों की महिला आयोग ने की सुनवाई पारिवारिक विवाद और उत्पीड़न से जुड़े मामलों पर आयोग ने दिए निर्देश

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बिलासपुर :— छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक द्वारा राज्य की महिलाओं को त्वरित राहत पहुँचाने के उद्देश्य से एक वृहद और संवेदनशील निर्णय लिया गया है। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोग द्वारा आगामी 10 मार्च 2026 को बिलासपुर संभाग के लिए महा जन-सुनवाई सप्ताह का आयोजन जिला पंचायत सभाकक्ष, बिलासपुर में किया जा रहा है। आज बिलासपुर संभाग में 02 महा जन-सुनवाई व प्रदेश स्तर पर 377वी एवं जिला स्तर पर 22वी सुनवाई हुई। जिसमें बिलासपुर संभाग के अंतर्गत आने वाले जिले बिलासपुर, रायगढ़, कोरबा, जांजगीर चांपा, सक्ति, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही, मुंगेली एवं सारंगढ़-बिलाईगढ़ के कुल 159 प्रकरणों की एक साथ सुनवाई की गई।

इस महा जन-सुनवाई में बिलासपुर संभाग के जिला कोरबा के 29 में से 06 प्रकरण, जांजगीर.चाम्पा के 22 में से 05 प्रकरण सक्ती के 10 में से 01 प्रकरण रायगढ़ के 46 में से 05 प्रकरण तथा सारंगढ़-बिलाईगढ़, के 13 में से 03, मंुगेली के 07 में से 03, जीपीएम 04, बिलासपुर के 19 में से 04 प्रकरण नस्तीबद्ध किया गया।  कुल 159 प्रकरण में से 34 प्रकरण नस्तीबद्ध किया गया। दोनो पक्षो के कुल 170 पक्षकारो ने पंजीयन कराया था बाकी पक्षकार अनुपस्थित है जिसमें आगामी निराकरण हेतु प्रकरण प्रस्तुत किया जायेगा।

एक अन्य प्रकरण में आवेदिका और अनावेदक मां बेटा है। आवेदिका अपने मकान बेचना चाहता है जिस पर आवेदक बेचने से रोक रहा है। आयोग के द्वारा समझाये जाने पर अनावेदक का कहना है कि उसकी मां आवेदिका को अपना मकान जिसे चाहे बेंच सकती है उस पर उसे कोई आपत्ति नहीं है। इस स्तर पर बिलासपुर की संरक्षण अधिकारी सीमा गोस्वामी को नियुक्त किया जाता है। आवेदिका संपर्क कर सकती है ताकि अनावेदक किसी भी तरह की रोक या दखल अंदाजी ना कर सके। इसके साथ प्रकरण नस्तीबद्ध किया जाता है।

 

एक अन्य प्रकरण में उभयपक्ष उपस्थित हैं। दोनों आपस में मां-बेटा है। बड़ा पुत्र जो दिल्ली में रहता है उसके कारण आवेदिका अपना मकान बेचना चाहती है। जिसमें अनावेदक रहता है। आवेदिका चाहती है कि उसका पुत्र उसका पूरा ध्यान रखे जिसके लिये वह तैयार है। इस प्रकरण की निगरानी संरक्षण अधिकारी सीमा गोस्वामी करती रहेंगी। आवेदिका को कभी भी परेशानी होने पर निगरानी करती रहेंगी। आवेदक अपनी मां को अपने साथ रखने की जिम्मेदारी लेता है। इसके साथ प्रकरण नस्तीबद्ध किया जाता है।

 

सुनवाई के दौरान एक अन्य प्रकरण में उभयपक्ष उपस्थित हैं। आवेदिका ने बताया कि उसकी आंतरिक शिकायत पर विभाग द्वारा कार्यवाही किया जा रहा है। कोरबा के संरक्षण अधिकारी को यह जिम्मेदारी दिया जाता है कि वह अनावेदक के कार्यालय में पत्र देकर आंतरिक समिति की जांच व कार्यवाही में उपस्थित रहेंगी। जिससे आवेदिका की कार्यवाही निष्पक्ष हों। प्रकरण की सुनवाई के पश्चात रिपोर्ट की कार्यवाही आयोग को प्रेषित करेंगे व इसकी निशुल्क काॅपी संरक्षण अधिकारी को दिये जाने निर्णय समिति द्वारा लिया गया, जिससे वह उन लोगों से संपर्क कर सके। अतः प्रकरण नस्तीबद्ध किया जाता है।

 

सुनवाई के दौरान एक अन्य प्रकरण आवेदिका केन्द्र सरकार की कर्मचारी है। जिसमें उसके वरिष्ठ अधिकारी अनावेदक है। आवेदक को आंखों की दिव्यंगता है, जिसके कारण अनावेदक को आवेदिका से परेशानी हो रही है। अनावेदक द्वारा आवेदिका को अनावश्यक कार्य दिये जाने की शिकायत किया है जबकि अनावेदक समय-समय पर आवेदिका को शोकाज नोटिश जारी करता है। आवेदिका को यह भय है कि अनावेदक अपने क्षेत्राधिकार का दुरूपयोग कर परेशान कर सकता है।

अनावेदक के द्वारा कहा गया कि आवेदिका सेवा मंे विलम्ब से पहुंचती है। इन समस्त बिन्दुओं की जांच राज्य स्तर के अधिकारी से कराया जाना उचित होगा। आवेदिका अपने राज्य के अधिकारी के नाम, नम्बर, पता लिखकर किये जाने हेतु निर्देश दिया गया जिसके आधार पर इसके प्रकरण की जांच हेतु राज्य स्तर के अधिकारी को दिया जावेगा। आयोग की ओर से राज्य स्तर के अधिकारी को पत्र प्रेषित किया जावेगा ताकि वह इस मामले की जांच कर अपने रिपोर्ट 02 माह में आयोग को प्रस्तुत करेंगे। प्रकरण आगामी सुनवाई हेतु दिनांक 13.03.2026 को बस्तर में रखा जावे।

 

सुनवाई के दौरान एक अन्य प्रकरण में उभयपक्ष उपस्थित हैं। अनावेदक पक्ष अपना प्रकरण कोर्ट से वापस लेने पर ही आवेदिका साथ में रहना चाहती है एवं आवेदिका कोर्ट के आदेशानुसार साथ में रहना चाहती है। अतः उक्त प्रकरण राज्य महिला आयोग से समाप्त किया जाता है।

सुनवाई के दौरान एक अन्य प्रकरण में उभयपक्ष उपस्थित है। आवेदिका अनावेदकगण के विरूद्ध थाना में पंजीकृत कराये व परिवाद पत्र दायर करें। अतः प्रकरण नस्तीबद्ध किया गया जाता है।

सुनवाई के दौरान एक अन्य प्रकरण में आवेदक क्र. 01 एवं अनावेदक क्र. 01 उपस्थित। शेष अनावेदक अनुपस्थित। अंर्तजातीय विवाह उभयपक्ष ने अपनी मर्जी से किया था और विवाह के 15 दिन बाद आवेदक को जातीय दोषारोपण कर घर से बाहर निकाल दिया। मौके पर उपस्थित महिला थाना प्रभारी मानकुंवर सिदार को निर्देशित किया जाता है कि वह प्रकरण में एफआईआर दर्ज करें तथा 01 माह के भीतर महिला आयोग को प्रतिवेदन प्रेषित करें। यह मामला शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना से संबंधित है। उक्त प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के बाद आयोग से नस्तीबद्ध किया जायेगा। महिला थाना प्रभारी को निशुल्क प्रति प्रदान कियो जाने हेतु निर्देश दिया गया।

 

एक अन्य प्रकरण में उभयपक्ष के द्वारा यह सहमति जतायी गयी कि वे दानों अब साथ में ही रहेंगे अनावेदक के द्वारा कथन किया गया कि वह पत्नी को मारपीट व गाली गलौच नहीं करेगा आवेदिका ने भी स्वीकार किया कि वह अनावेदक को क्रोध नहीं दिलाएगी। दोनों अब साथ मेें ही रहेगे। दहेज के नाम पर अनावेदक आवेदिका को परेशान नहीं करेगा तथा किसी भी परिस्थित में आवेदिका के साथ मारपीट व गाली गलौच नहीं करेगा तथा उसकी सभी आवसश्कताओं की पूर्ति करेगा तथा एक पिता होने के नाते संतान की सभी आवश्यकताओं की पूर्ति करेगा।

अनावेदक 13 मार्च को आवेदिका व संतान को अपने साथ ले जाएगा बिलासपुर की संरक्षण अधिकारी दिनांक 13 मार्च को उभय पक्ष की रतानगी के लिये कार्यवाही करेंगी तथा 01 वर्ष तक निगरानी करेंगी।

 

एक अन्य प्रकरण में आवेदक ने 18 वर्ष पुराने मामले को लेकर आयोग में शिकायत किया गया, जो कि अनावेदक आवेदिका का रिश्ते में भतीजा है। अनावेदक का 04 वर्ष पूर्व विवाह हो गया है। तब आवेदक द्वारा आयोग में शिकायत किया गया है कि ऐसी स्थिति में इस प्रकरण को आयोग में सुने जाने से कोई औचित्य नहीं होता है एवं अनावेदक को समझाईस दिया गया कि आवेदक को 80,000/- रूपये संरक्षण अधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर देंगे।

इस निर्देश के साथ प्रकरण नस्तीबद्ध किया जाता है।

एक अन्य प्रकरण में आवेदिका व अनावेदक क्र. 02 उपस्थित है। दिवानी न्यायालय में प्रकरण लंबित है। वह अनावेदक के विरूद्ध थाना में अपराधिक मामला करना चाहती है व थाना कांकेर में जाकर एफआईआर करवा सकती है व न्यायालय में प्रकरण दर्ज करवा सकती है। अतः प्रकरण नस्तीबद्ध किया जाता है।

एक अन्य प्रकरण में उभय पक्ष उपस्थित है। अनावेदकगण अनुपस्थित। अनावेदक की ओर से उनकी पत्नी जो स्वयं पार्षद है, उभयपक्ष को सुनने से यह स्पष्ट हुआ कि बिलाईगढ़ थाना में अनावेदक के विरूद्ध एफआईआर दर्ज हो गया है तथा अनावेदक वर्तमान में फरार है और मामला न्यायालय के विचाराधीन होने से मामला आयोग में सुना जाने योग्य नहीं है। फलतः प्रकरण नस्तीबद्ध किया जाता है।

 

एक अन्य प्रकरण में आवेदक आवेदिका की सौतेली मां है। अनावेदिका आवेदिका के पिता की मृत्यु 2013 में होने के बाद जिसका क्लेम में 25 लाख रूपये आवेदिका की सौतेली मां ने रख लिया है। आज आयोग के समक्ष उपस्थित होकर कह रही है कि आवेदिका को क्लेम का पैसा देना है और दूसरी तरफ खेती की सारी जमीन फावती के आधार पर अपना हिस्सा अलग करते जा रही है और आवेदिका के पालन पोषण के लिए पैसा खर्चा नहीं की है। इस पर संरक्षण अधिकारी जांजगीर चांपा को निर्देशित किया जाता है कि आवेदिका का आवश्यक सहयोग करें एवं आवेदिका को निर्देशित किया जाता है कि एसडीएम कोर्ट में जा कर अचल संपत्ति का फावती लगावे तथा संपत्ति का ब्यौरा तैयार किया जाकर सम्पूर्ण आवेदिका के हिस्से को प्राप्त करने में सहयोग हो सके एवं एसडीएम के माध्यम से संपत्ति प्राप्ति में सभी आवश्यक सहयोग विधिवत किया जा सके। यह निर्देशित संरक्षण अधिकारी को किया जाता है कि उक्त संपूर्ण विधिवत प्रक्रिया किया जाकर 02 माह में अपना प्रतिवेदन आयोग के समक्ष प्रस्तुत करें तथा उक्त आधार पर प्रकरण नस्तीबद्ध किया जा सकेगा तथा यह भी निर्देशित किया जाता है कि एनओसी के आधार पर विधिक कार्यवाही किया जाना सुनिश्चित करें एवं उक्त नोटशीट की एक प्रति संरक्षण अधिकारी को निशुल्क उपलब्ध करावाया जाता है। प्रकरण नस्तीबद्ध किया जाता है।

आवेदिका ने आवेदक के खिलाफ शिकायत किया है कि उसके पति स्व. सुरेश की मृत्यु 2010 में हुई थी। उनके खिलाफ बेबुनियाद और अनर्गल बाते लिखकर कलेक्टर कार्यालय जीपीएम में शिकायत किया था और उसकी काॅपी को सर्व ब्राम्हण समाज और रामसेना गु्रप में पोस्ट किया था और आवेदिका के स्व. पति को रिश्वतखोर और निलंबित बताते हुए मृत व्यक्ति की मानहानि कर आवेदिका और उसके परिवार को अपमानित किया है। इस पूरे मामले में अनावेदक से पूछने पर उसने इस बात को स्वीकार किया है कि आवेदिका की पुत्र उमेश कुमार के खिलाफ शिकायत कलेक्टर जीपीएम में किया था। उस शिकायत में आवेदिका के पति स्व. सुरेश दुबे का नाम भी उल्लेखित है। आवेदिका की शिकायत की पुष्टि होती है और यह प्रमाणित है कि आवेदक ने आवेदिका की पति के मृत्यु उपरांत मानहानि भी किया है और उसे सोशल मिडिया में प्रसारित कर आवेदिका को मानसिक रूप से प्रताड़ित भी किया है और अपमानित भी किया है जो कि स्पष्ट रूप से मानहानि की श्रेणी में आता है। इस स्तर पर अनावेदक से कहा गया कि वह स्व. सुरेश दुबे के खिलाफ लिखे गये अपशब्द के खिलाफ माफी मांगना चाहता है या नही। इस पर अनावेदक ने स्पष्ट रूप से माफी मांगने से इंकार किया। ऐसी स्थिति में आवेदिका को यह निर्देशित किया जाता है कि इस अनावेदक के खिलाफ मानहानि का प्रकरण पहले अपने पुलिस थाना में दर्ज करावे और उसके बाद न्यायालय में मानहानि का परिवाद दायर करें और अपने मृत पति स्व. सुरेश दुबे की 13 वर्ष मृत्यु के पश्चात किये गये मानहानी के लिए दीवानी एवं फौजदारी का मामला दायर करा सकते है। अतः प्रकरण नस्तीबद्ध किया जाता है।

इसी स्तर पर आयोग की सुनवाई में उपस्थित सभी पत्रकार-साथियों ने अनावेदक को समझाईश दिया कि आवेदक से माफी मांग ले तथा अनावेदक आयोग के समक्ष सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए खेद प्रकट किया कि स्व. सुरेश दुबे जी के विरूद्ध जो प्रचार-प्रसार किया जाकर उनका व उनके परिवार वालों का अपमान किया है, उसके लिये वह शर्मिंदा है एवं खेद प्रकट किया गया।

एक अन्य प्रकरण में उभय पक्ष उपस्थित है। उभयपक्षकारों के बीच आपसी समझाईश अनुसार एक-दूसरे के कार्याें पर हस्तक्षेप नहीं करेंगे तथा अपना कार्य नियमानुसार करेंगे तथा एक-दूसरे के सहयोग से अपने कर्तव्यों का पालन करेंगे। एक-दूसरे को किसी भी प्रकार से भविष्य में प्रताड़ित नहीं करेंगे। अतः प्रकरण नस्तीबद्ध किया जाता है।

एक अन्य प्रकरण में उभय पक्ष उपस्थित है। आवेदिका अनावेदक दोनों के मध्य 04 प्रकरण न्यायालय में प्रक्रियाधीन है। आवेदिका ने कहा कि अनावेदक पांच साल में पति बदल लेता है। आवेदिका कथन है कि पति चौथी शादी करने वाला है उसमें रोक लगाना चाहती है। अभी की स्थिति में आवेदिका व अनावेदक के मध्य तलाक नहीं हुआ है दोनों विधिवत पति-पत्नि है। इसलिए आवेदिका अनावेदक व अन्य के विरूद्ध कार्यवाही कर सकती है। अनावेदक यदि चैथी शादी करता है तो कोरबा संरक्षण अधिकारी के माध्यम से व पुलिस अधिकारी के माध्यम से विवाह रोक सकती है। अतः प्रकरण नस्तीबद्ध किया जाता है।

 

एक अन्य प्रकरण में उभय पक्ष उपस्थित है। उभयपक्षकारों के बीच आपसी समझाईश अनुसार एक-दूसरे के कार्याें पर हस्तक्षेप नहीं करेंगे तथा अपना कार्य नियमानुसार करेंगे तथा एक-दूसरे के सहयोग से अपने कर्तव्यों का पालन करेंगे। एक-दूसरे को किसी भी प्रकार से भविष्य में प्रताड़ित नहीं करेंगे। अतः प्रकरण नस्तीबद्ध किया जाता हैं।

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भूपेन्द्र पाण्डेय

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