बिलासपुर :— शासन-प्रशासन भले ही सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और सुशासन के दावे करता हो, लेकिन छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (CREDA) के राजकिशोर नगर स्थित जोनल कार्यालय में स्थिति इसके बिल्कुल उलट है। यहाँ सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी उपलब्ध कराना तो दूर, जन सूचना अधिकारी (PIO) का संपर्क नंबर मिलना भी आम आदमी के लिए ‘नाममुकिन’ लक्ष्य बन गया है।
कार्यालय की अव्यवस्था का आलम यह है कि अधिकारी की अनुपस्थिति में जब वहां मौजूद स्टाफ से संपर्क नंबर मांगा जाता है, तो वे स्पष्ट इंकार कर देते हैं। पूछने पर कर्मचारियों का कहना होता है कि उन्हें स्वयं जन सूचना अधिकारी ने ही निर्देश दिया है कि उनका नंबर किसी को न दिया जाए। यह स्थिति न केवल संदेहास्पद है, बल्कि पारदर्शिता के नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाती है।
नियमतः प्रत्येक सरकारी कार्यालय के बाहर सूचना पटल पर जन सूचना अधिकारी और प्रथम अपीलीय अधिकारी का नाम व मोबाइल नंबर अंकित होना अनिवार्य है। लेकिन क्रेडा के इस जोनल कार्यालय के बाहर लगे बोर्ड पर किसी भी जिम्मेदार का नाम-नंबर दर्ज नहीं है। बोर्ड पर एक मात्र लैंडलाइन नंबर मौजूद है, जो तकनीकी रूप से ‘आउट ऑफ कवरेज’ या ‘सुविधा में नहीं’ है।
जब सरकारी तंत्र जनता की सेवा और अक्षय ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए बनाया गया है, तो जानकारी साझा करने में इतनी गोपनीयता क्यों? क्या कार्यालय में चल रहे कार्यों में कुछ ऐसा है जिसे छिपाने का प्रयास किया जा रहा है?
किसी सरकारी दफ्तर में जन सूचना अधिकारी का नंबर न मिलना या स्टाफ द्वारा इसे गोपनीय बताना, सीधे तौर पर नागरिक अधिकारों का हनन है। यह देखना होगा कि शासन इस अव्यवस्था पर कब संज्ञान लेता है।
यह देखना अब शासन और प्रशासन के पाले में है कि वे इस ‘अव्यवस्थित और निंदनीय’ कार्यप्रणाली में सुधार के लिए क्या कदम उठाते हैं, या फिर आम जनता इसी तरह दफ्तरों के चक्कर काटती रहेगी।