बिलासपुर। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 21 जून की तैयारियों के अंतर्गत ब्रह्माकुमारीज़ के शिव अनुराग भवन, राज किशोर नगर में आयोजित योग अभ्यास शिविर के तीसरे दिन मंजू दीदी ने भारत सरकार द्वारा निर्धारित योग प्रोटोकॉल की वैज्ञानिक एवं विवेकपूर्ण संरचना पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि योग प्रोटोकॉल को इस प्रकार तैयार किया गया है कि हर आयु वर्ग का व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार इसका लाभ उठा सके। योगाभ्यास में पहले सरल चालन क्रियाओं और आसान आसनों से शुरुआत की जाती है, फिर धीरे-धीरे मध्यम और उसके बाद कठिन अभ्यासों की ओर बढ़ा जाता है। यही क्रम शरीर को सुरक्षित रखते हुए उसकी क्षमता और लचीलेपन का विकास करता है।
उन्होंने आज कपालभाती प्राणायाम के बारे में बताते हुए कहा कि शुरुआत एक या दो मिनट से कर सकते हैं लेकिन सही स्वास्थ्य लाभ प्राप्त करने के लिए कम से कम 5 मिनट लगातार अभ्यास करना जरूरी है। इसे ऐसे समझ जा सकता है जैसे हम पानी गर्म करने के लिए गैस चालू करते हैं फिर तुरंत बुझा देते हैं। जब तक पानी को 100 डिग्री तक गर्म ना किया जाए तब तक नहीं उबलेगा। इस प्रकार कपालभाति प्राणायाम को 1 सेकंड में एक बार की आवृत्ति रखते हुए कम से कम 5 मिनट अर्थात 300 झटके लगाना जरूरी है तभी सकारात्मक परिणाम हमें मिलेगा और हृदय रोगियों को धीमी गति से करना चाहिए।
इस अवसर पर उपस्थित प्रतिभागियों के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ सदस्य 90 वर्षीय शरद बलहाल विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। उन्नत आयु के बावजूद वे पूरे उत्साह और अनुशासन के साथ योगाभ्यास में भाग ले रहे हैं। विशेष रूप से वृक्षासन जैसे संतुलन आधारित आसन को भी वे अत्यंत सहजता और आत्मविश्वास के साथ कर लेते हैं। उनकी सक्रियता और ऊर्जा ने युवा प्रतिभागियों को भी प्रेरित किया।
मंजू दीदी ने शरद का उदाहरण देते हुए कहा कि योग व्यक्ति को केवल स्वस्थ ही नहीं बनाता, बल्कि बढ़ती आयु में भी शरीर की कार्यक्षमता, मानसिक संतुलन और आत्मबल को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि नियमित रूप से योग को जीवन का हिस्सा बना लिया जाए तो व्यक्ति लंबे समय तक सक्रिय और ऊर्जावान रह सकता है।