बिलासपुर। स्वतंत्रता आंदोलन की स्मृतियों और हिंदी साहित्य की राष्ट्रवादी चेतना को कविता, संगीत और नृत्य के माध्यम से मंच पर जीवंत किया गया। रवीन्द्र भवन में डीआर सीवी रमन विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़ की ओर से आयोजित ‘स्वाधीनता के गान’ कार्यक्रम में युवा कलाकारों और नौनिहालों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को आजादी के संघर्ष के दौर से रूबरू कराया। कार्यक्रम के दौरान सभागार देशभक्ति के नारों और तालियों से गूंजता रहा। समापन वंदेमातरम की प्रस्तुति के साथ हुआ, जिसके दौरान दर्शकों ने तिरंगे लहराकर कलाकारों का उत्साह बढ़ाया। कार्यक्रम का उद्देश्य हिंदी पत्रकारिता की दो सदी की यात्रा के साथ साहित्य और राष्ट्र निर्माण के बीच रहे संबंध को सामने लाना था। कविता, संगीत और नृत्य के जरिए स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान साहित्यकारों और रचनाकारों की भूमिका को रेखांकित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन को जन-जन तक पहुंचाने में कवियों और साहित्यकारों की भूमिका महत्वपूर्ण रही। उनकी रचनाओं ने लोगों के भीतर देशप्रेम और स्वतंत्रता की भावना को मजबूत किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा साहित्य और कला को जोडक़र स्वतंत्रता संग्राम की चेतना को जिस रचनात्मक अंदाज में प्रस्तुत किया गया, वह सराहनीय है। विशेष रूप से बेटियों द्वारा पूरी प्रस्तुति दिए जाने को उन्होंने आयोजन की उल्लेखनीय विशेषता बताया। कार्यक्रम में राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष ममता साहू, पद्मश्री विजय दत्त श्रीधर, साहित्यकार ज्योति रघुवंशी, रंगकर्मी राजकमल नायक, विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. अरविंद कुमार तिवारी, समकुलपति डॉ. जयंती चटर्जी सहित साहित्यकार, कलाकार, विद्यार्थी और बड़ी संख्या में शहरवासी मौजूद रहे।
राष्ट्रभक्ति की कविताओं ने रचा मंच पर इतिहास, स्वाधीनता के गान में दिखी आजादी की गाथा
Read Time:2 Minute, 55 Second