बिलासपुर। हिन्दी को वैश्विक स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए शिक्षा, साहित्य, तकनीक और डिजिटल माध्यमों के साथ युवा पीढ़ी की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। डॉ. सीवी रमन विश्वविद्यालय में हिन्दी दिवस के अवसर पर आयोजित परिचर्चा में वक्ताओं ने हिन्दी के बदलते स्वरूप और उसके सामने मौजूद चुनौतियों पर विचार साझा किए। भाषा एवं साहित्य विभाग की ओर से 16 सितंबर को हिन्दी का वैश्वीकरण संभावनाएं और चुनौतियां विषय पर एक दिवसीय परिचर्चा हुई। मुख्य अतिथि डॉ. हीरा लाल शर्मा ने कहा कि हिंदी भारत की सीमाओं से आगे बढक़र कई देशों में अपनी पहचान बना रही है। वैश्विक विस्तार के लिए हिंदी को समयानुकूल बनाना और युवाओं को इससे जोडऩा आवश्यक है। कुलपति प्रो. प्रदीप घोष ने हिंदी को भारतीय साहित्य और संस्कृति की महत्वपूर्ण संवाहक बताते हुए शिक्षा और तकनीक के माध्यम से इसके विस्तार पर जोर दिया। समकुलपति डॉ. जयति चटर्जी ने कहा कि डिजिटल माध्यमों ने हिंदी के प्रसार के नए अवसर उपलब्ध कराए हैं। कार्यक्रम में कहानी लेखन और कविता पाठ प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया गया। कविता पाठ में विद्यार्थियों के साथ शिक्षकों ने भी सहभागिता की। मुख्य अतिथि को स्मृति-चिह्न भेंट किया गया। विश्वविद्यालय हिन्दी को वैश्विक मंच पर स्थापित करने के लिए विश्व रंग फाउंडेशन के साथ कार्य कर रहा है। इसके तहत करीब 60 देशों में हिंदी के प्रचार-प्रसार और वैश्विक विमर्श को बढ़ावा दिया जा रहा है। विज्ञान एवं तकनीकी लेखन की ‘इलेक्ट्रॉनिकी’ पत्रिका 45 वर्षों से हिंदी में प्रकाशित हो रही है। ‘आपला’ पत्रिका और ‘वनमाली सृजन पीठ’ के जरिए विद्यार्थियों और नवोदित रचनाकारों को भी मंच दिया जा रहा है।
हिंदी दिवस पर सीवीआरयू में परिचर्चा, कहानी-कविता प्रतियोगिता के विजेताओं का हुआ सम्मान
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