बिलासपुर। नवरात्र के छठवें दिन कात्यायनी देवी के रूप में मां बगलामुखी देवी का पूजन किया गया। प्रतिदिन श्री शारदेश्वर पारदेश्वर महादेव का रुद्राभिषेक, श्री महाकाली, महालक्ष्मी एवं महासरस्वती देवी का श्रीसूक्त एवं षोडश मंत्रों द्वारा दूधधारा सहित अभिषेक तथा भगवान श्रीरामचंद्र जी एवं श्री सिद्धिविनायक गणेश जी का पूजन-श्रृंगार किया जा रहा हैं। पीतांबरा पीठाधीश्वर आचार्य डॉ. दिनेश महाराज ने बताया कि शारदीय नवरात्र के सातवें दिन मां दुर्गा के सप्तम स्वरूप कालरात्रि के रूप में मां श्री ब्रह्मशक्ति बगलामुखी देवी का विशेष पूजन किया जाएगा। शारदीय नवरात्र के सातवें दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना की जाती है। मां कालरात्रि का स्वरूप अत्यंत उग्र होने के बावजूद भक्तों के लिए कल्याणकारी व अभय प्रदान करने वाला है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वे अपने भक्तों के भय, नकारात्मकता और बाधाओं को दूर कर उन्हें साहस, आत्मबल तथा धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्रदान करती हैं। मां कालरात्रि की विधि-विधान से पूजा करने पर भक्त उनसे भयमुक्त जीवन, मानसिक शांति, आत्मविश्वास, संकटों का सामना करने की शक्ति व परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। उनकी आराधना व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने, बुराइयों से संघर्ष करने और सत्य के मार्ग पर अडिग रहने का संदेश देती है। मां कालरात्रि को दुष्ट शक्तियों का विनाश करने वाली तथा अपने भक्तों की रक्षा करने वाली देवी माना जाता है। मां कालरात्रि की पूजा का आध्यात्मिक संदेश है कि जीवन के अंधकार, भय और कठिनाइयों के बीच भी साहस, विश्वास और सकारात्मकता बनाए रखनी चाहिए। सच्ची श्रद्धा, सदाचार और संयम के साथ की गई आराधना भक्त के मन में आत्मबल और ईश्वर के प्रति विश्वास को दृढ़ करती है। मो कालरात्रि की कृपा से जीवन में निर्भयता, विवेक, धैर्य और मंगल की प्राप्ति की कामना की जाती है।
श्री पीताम्बरा पीठ त्रिदेव मंदिर में शारदीय नवरात्र का किया जा रहा आयोजन
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