बिलासपुर। जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान, निर्बाध बिजली आपूर्ति और शहर के विकास के लिए केंद्र सरकार से अधिक वित्तीय सहायता लाना बिलासपुर की प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए। जनता ने दोबारा विधायक बनने का अवसर दिया तो इन मुद्दों पर काम करूंगा। पूर्व विधायक शैलेष पांडेय ने रविवार को बिलासपुर प्रेस क्लब के पारंपरिक कार्यक्रम हमर पहुना में शहर की बुनियादी समस्याओं पर अपनी बात रखते हुए कहा।
बिलासपुर प्रेस क्लब में रविवार को पहुंना कार्यक्रम में आयोजित कार्यक्रम में पत्रकारों से बातचीत करते पांडेय ने अपने राजनीतिक सफर, शिक्षा और तकनीक के क्षेत्र में किए गए कार्यों के साथ बिलासपुर के विकास से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा की। एयरपोर्ट के विस्तार, अरपा नदी के संरक्षण, नगर निगम सीमा विस्तार, बी-ग्रेड सिटी का दर्जा, अंग्रेजी माध्यम शिक्षा, बिजली दरों और कोरोना काल में जनसेवा के अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने शहर की समस्याओं के समाधान के लिए दीर्घकालिक योजना और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय की जरूरत बताई। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद विधायक शैलेष पांडेय को मंत्रिमंडल में स्थान मिलने की उम्मीद जताई जा रही थी। शिक्षा के क्षेत्र में उनके अनुभव को देखते हुए उन्हें शिक्षा मंत्री बनाए जाने की चर्चा भी थी। इस सवाल पर पांडेय ने कहा कि विधायक के पहले कार्यकाल में सीखने और समझने का अवसर मिलता है। मंत्रिमंडल का गठन करना और अपनी टीम चुनना मुख्यमंत्री का अधिकार है। बिलासपुर एयरपोर्ट की सुविधाओं के विस्तार और उड़ानों के संचालन का जिक्र करते हुए पांडेय ने कहा कि उन्होंने विधानसभा में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। एयरपोर्ट की थ्री-सी श्रेणी और नाइट लैंडिंग की सुविधा से जुड़े प्रयासों के साथ विभिन्न शहरों के लिए उड़ान सेवाएं शुरू करने की दिशा में भी पहल की गई। उन्होंने एयरपोर्ट का नाम बिलासा देवी केंवटीन एयरपोर्ट रखने के लिए विधानसभा में संकल्प लाने की अपनी भूमिका का उल्लेख किया। पांडेय ने अरपा नदी को शहर की भावनात्मक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय पहचान से जुड़ा बताया। शिवघाट और दूसरे प्रस्तावित बैराजों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन परियोजनाओं का उद्देश्य नदी में पानी बनाए रखने और शहर की जरूरतों को पूरा करने में मदद करना था। उन्होंने अरपा संरक्षण से जुड़े आंदोलनों और पदयात्राओं को याद करते हुए कहा कि बिलासपुर को सुंदर और व्यवस्थित शहर बनाने के लिए नदी संरक्षण, जल निकासी और शहरी आधारभूत ढांचे पर एक साथ काम करना होगा।
जलभराव और बिजली संकट से निजात दिलाना प्राथमिकता: पांडेय
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