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पाम ऑयल उत्पादन से किसानों की आमदनी में होगा चौगुना इज़ाफा 9 जून से 9 जुलाई तक चलेगा ऑयल पाम पौधरोपण अभियान

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बिलासपुर // जिले में वर्ष 2025-26 में नेशनल मिशन ऑन एडीबल ऑयल-ऑयल पाम योजनांतर्गत् पौध रोपण हेतु कुल 300 हेक्टेयर का भौतिक लक्ष्य प्राप्त हुआ है। जिसके तहत भारत सरकार के कृषि एवं किसान मंत्रालय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में ऑयल पाम की खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण एवं पौधारोपण अभियान चलाए जा रहे है। छ.ग. राज्य में प्लानटेंशन ड्राइव के तहत् पाम तेल उत्पादन को बढ़ावा देने और किसानों की आय बढ़ाने में मदद करेगा। यह प्लानटेंशन ड्राइव 9 जून से 9 जुलाई 2025 तक चलाया जा रहा है।

जिले में विकासखंड तखतपुर के ग्राम पंचायत गनियारी के आश्रित ग्राम घोघाड़ीह में मेगा ऑयल पाम प्लानटेंशन ड्राइव के तहत् किसान श्री अजय गुप्ता के 01 हेक्टेयर (143 पौधे) रकबे के खेत में पौधरोपण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ जिला पंचायत अध्यक्ष श्री राजेश सूर्यवंशी के द्वारा पौध रोपण कर किया गया। कार्यक्रम में उपसंचालक उद्यान श्री नारायण सिंह लावत्रे, उद्यान अधीक्षक तखतपुर श्री जैनेन्द्र कुमार पैकरा, प्रबंधक प्रीयूनिक एशिया प्रायवेट लिमिटेड श्री संजीव गाईन सहित विभागीय अधिकारी-कर्मचारी मौजूद थे।

इस प्लानटेंशन ड्राइव के माध्यम से केन्द्र एवं राज्य सरकार मिलकर किसानों को भरपूर अनुदान, तकनीकी मार्गदर्शन और विपणन की गारंटी दे रही है। इससे किसानों की आय में स्थायी रुप से बढ़ावा मिलेगा और देश में खाद्य तेलों की आत्मनिर्भरता भी सशक्त बनेगी। भारत को खाद्य तेल में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आयल पॉम पौध रोपण अहम कदम है। भारत में वर्तमान में 60 से 70 प्रतिशत खाद्य तेल का आयात किया जाता है, जिसमें अकेले पाम ऑयल की हिस्सेदारी लगभग 55-60 प्रतिशत है। इस चुनौती को देखते हुए ऑयल पाम की खेती को बढ़ावा देना रणनीतिक एवं आर्थिक दोनों दृष्टियों से अत्यंत आवश्यक हो गया है।

ऑयल पाम एक ऐसी फसल है, जिसमें न्यूनतम मजदूर की आवश्यकता होती है। ऑयल पाम पौधे में बीमारी होने की संभावना कम होती है। इसकी विशेषता यह है कि एक बार पौधरोपण करने के बाद चौथे वर्ष से उत्पादन शुरु होकर लगातार 25-30 वर्षों तक उत्पादन लिया जा सकता है। प्रति हेक्टेयर 143 पौधे त्रिकोणीय विधि से लगाए जाते है. जिससे चौथे वर्ष में 4-6 टन और सातवें वर्ष के बाद 20-25 टन उत्पादन होने लगता है। यह फसल प्रति हेक्टेयर पारंपारिक फसलों की तुलना में 4 से 6 गुना अधिक तेल उत्पादन देती है। किसान प्रति हेक्टेयर 3 से 4 लाख तक की सालाना आय प्राप्त कर सकते है। यह धान के बदले अन्य फसलों के विकल्प के रुप में एक अच्छा फसल है। यह फसल न्यूनतम सिंचाई में भी अच्छा उत्पादन का माध्यम है। पाम ऑयल की खेती न केवल फायदेमंद है, बल्कि देश की खाद्य तेलों पर आयात की निर्भरता को भी कम करेगी।

योजना के संबंध में अधिक जानकारी के लिए किसान उद्यानिकी विभाग में कार्यरत अधिकारियों एवं प्रतिनिधि कंपनी से संपर्क कर सकते है। इनमें श्री अशोक कुमार परस्ते, वरि.उ.वि. अधिकारी बिल्हा-9617483390, श्री जैनेन्द्र कुमार पैकरा, उ.विकास अधिकारी, तखतपुर-6265981957, श्री साधूराम नाग, वरि.उ.वि. अधिकारी, कोटा-9165490297, श्रीमती निशा चंदेल, प्रभारी उद्यान अधीक्षक मस्तूरी-7000441324, श्री संजीव गाईन, प्रबंधक प्रीयूनिक एशिया प्रायवेट लिमि.- 9630053999, श्री शिव भास्कर, क्षेत्रीय प्रतिनिधि प्रीयूनिक एशिया प्रायवेट लिमि-9131004397 शामिल है।

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भूपेन्द्र पाण्डेय

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