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जिले में सौर ऊर्जा से बदल रही तस्वीर किसानों की बढ़ी आय, गांवों में फैली रोशनी

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बिलासपुर // छत्तीसगढ़ राज्य जब अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे कर रहा है, तब यह रजत जयंती वर्ष विकास की कई नई कहानियों का साक्षी बन रहा है। राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे नवाचार और सतत विकास की पहल अब जमीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। इन्हीं प्रयासों की एक मिसाल है , जिले में सौर ऊर्जा के उपयोग से हो रहा परिवर्तन, जिसे क्रेडा द्वारा संचालित योजनाओं के माध्यम से संभव बनाया गया है।

 

**सोलर पंपों से बदली किसानों की किस्मत**

 

‘सौर सुजला योजना’ के तहत जिले में अब तक 1966 सोलर पंप (7362 किलोवॉट क्षमता) किसानों को प्रदान किए गए हैं। इससे अब किसान साल में दो से तीन फसलें ले पा रहे हैं, जिससे उनकी आय में लाभदायक वृद्धि हुई है। परंपरागत बिजली पर निर्भरता कम होने से लागत भी घटी है।

 

*ग्रामीण इलाकों में पहुंची बिजली की रोशनी**

 

क्रेडा द्वारा ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत जिले के 7 ग्रामों और 18 मजराटोलों में 113.7 किलोवॉट क्षमता के 18 सोलर पावर प्लांट लगाए गए हैं। इनसे 388 घरों में बिजली पहुंची है, वहीं 157 सोलर स्ट्रीट लाइटों ने गांव की गलियों को रोशन कर दिया है।

 

*शासकीय संस्थानों में सौर ऊर्जा से सुविधा में इजाफा**

 

321.5 किलोवॉट की कुल क्षमता वाले 87 सोलर पावर प्लांट जिले के स्वास्थ्य केंद्रों, स्कूलों और अन्य शासकीय भवनों में लगाए गए हैं, जिससे अब इन संस्थानों को निर्बाध विद्युत आपूर्ति मिल रही है।

 

*हाईमास्ट लाइटों से रोशन हुए चौक और बाजार**

 

जिले के चौराहों, बाजार स्थलों और प्रमुख स्थानों पर 204 सोलर हाईमास्ट लाइट्स (183.6 किलोवॉट) स्थापित की गई हैं। इससे गांवों में रात्रिकालीन सुरक्षा और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा मिला है।

 

*सोलर ड्यूल पंप**

जिले के विभिन्न गांवों में पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने 209 किलोवॉट क्षमता के 239 सोलर ड्यूल पंप और जल जीवन मिशन के तहत घरों में पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने 254 सोलर ड्यूल पंप (304.8 किलोवॉट) लगाए गए हैं, जिससे अब ग्रामीणों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो रहा है।

वहीं 2231 बायोगैस संयंत्रों ने ग्रामीण परिवारों को स्वच्छ ईंधन और जैविक खाद का विकल्प दिया है, जिससे लकड़ी की खपत और वनों की कटाई में कमी आई है।

 

*पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक पहल*

 

जिले में अब तक कुल 67832 किलोवॉट क्षमता के सौर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। इनसे प्रतिदिन लगभग 28,490 किलोग्राम कार्बन उत्सर्जन में कमी आ रही है, जो 1425 पेड़ों द्वारा अवशोषित कार्बन डाई ऑक्साइड के बराबर है।

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भूपेन्द्र पाण्डेय

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