बिलासपुर। दसलक्षण पर्व के पाचवें दिन उत्तम सत्य धर्म दिवस मनाया गया। सत्य एक भावना है, जिसका अर्थ है, हमारे वास्तविक स्वरूप को प्राप्त करना या हमारी आत्मा के शुद्धतम रूप के करीब पहुंचना। जैन धर्म के पर्वाधिराज दशलक्षण महापर्व तृतीय दिवस उत्तम सत्य धर्म के दिन पूज्य 105 अकम्पमति माता जी व अचलमति माता जी के सानिध्य में धार्मिक आयोजन हो रहे हैं। उत्पाद व्यय द्रव्य ही सत्य है, आचार्य श्री ने कहा था आना जाना लगा हुआ है। सत्य का पूर्ण रूप से नाश नहीं हो सकता है। सत्य हमेशा जीतता है सामने अवश्य आता है। आत्मा की शरण सत्य है, जिसने आत्मा की शरण प्राप्त कर लिए उसने सत्य प्राप्त कर लिए। सत्य कभी पराजित नहीं होता, आत्मा सबसे बड़ा सत्य है। पर्व के दौरान बाहर से आए सभी श्रावक श्राविकाओं के भोजन की व्यवस्था समाज के संरक्षक श्रीमंत सेठ प्रवीण शकुन जैन, श्रीमंत सेठ विनोद रंजना जैन, सुकुमार सरिता जैन परिवार की तरफ से क्रांतिनगर जैन भवन में की गई है। जिसका लाभ प्रतिदिन लोग ले रहे है। दुनिया की सच्चाई है जो शास्त्रों के महत्व को नहीं समझता वह सत्य से कोसों दूर रहेता है। वास्तु का स्वरूप जैसा है वैसा मानना ही सत्य है। सत्य परास्त भी हो जाए तो हार नहीं मानना चाहिए। प्राण चले जाए पर सत्य का साथ नहीं छोडऩा चाहिए। मनुष्य अनेक कारणों से असत्य बोला करता है। क्रोध, लोभ, भय और हंसी-मजाक आदि के कारण ही झूठ बोला जाता है। उनमें से एक तो झूठ बोलने का प्रधान कारण लोभ है। लोभ में आकर मनुष्य अपना स्वार्थ सिद्ध करने के लिए असत्य बोला करता है। त्रिशला महिला मंडल सन्मति विहार के द्वारा परमपूज्य आर्यिका माताजी द्वारा लिखित अभूतपूर्व ऐतिहासिक नाटक दान चिंतामणि की शानदार प्रस्तुति दी गई। यह नाटक कर्नाटक माता व दान चिंतामणि के नाम से प्रसिद्ध सती अतिमब्बे के त्याग, तपस्या व दान की कहानी है। त्रिशला महिला मंडल ने नाटक को पुन: ऐतिहासिक बनाने के लिए काफी मेहनत की। नाटक में भाग किरदार निभाने वालों में अत्तिमब्बे का डॉ मीनल जैन, गुड्डुमब्बे का स्वप्निता जैन, सूत्रधार का डॉ कमोद जैन, राजा चामुण्डराय का रोशिनी जैन, समेत अन्य कलाकारों को सम्मानित किया गया।
दसलक्षण पर्व के 5 वे दिन उत्तम सत्य धर्म दिवस मनाया गया
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