बिलासपुर। चिकित्सा शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें मानवीय संवेदना, नैतिकता और सेवा भावना का भी विशेष महत्व है। कैडेवर विद्यार्थियों के प्रथम शिक्षक के समान है, जिसके माध्यम से वे मानव शरीर की संरचना को प्रत्यक्ष रूप से समझते हैं। इसके प्रति सम्मान और कृतज्ञता की भावना विद्यार्थियों में जीवनभर बनी रहनी चाहिए। चिकित्सा शिक्षा के दौरान अर्जित ज्ञान और कौशल का उपयोग समाज एवं मानवता की सेवा के लिए करना ही एक चिकित्सक का प्रमुख दायित्व है। ये बातें सिम्स के डीन डॉ. रमणेश मूर्ति ने कही। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान सिम्स के शरीर रचना विज्ञान विभाग में एमबीबीएस बैच 2026-27 के नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए कैडेवरिक शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया गया। एमएस डॉ. लखन सिंह ने कहा कि एमबीबीएस बैच 2026-27 के सभी नवप्रवेशित विद्यार्थियों को बधाई दी। उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कैडेवरिक शपथ के माध्यम से विद्यार्थियों ने अपने प्रथम शिक्षक के रूप में कैडेवर के प्रति सम्मान, कृतज्ञता एवं संवेदनशीलता व्यक्त की। साथ ही चिकित्सा शिक्षा के दौरान प्राप्त ज्ञान का उपयोग मानवता और समाज की सेवा के लिए करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में डीन डॉ. रमणेश मूर्ति, शरीर रचना विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. शिक्षा जांगड़े ने की। विभाग के संकाय सदस्य डॉ. वीना मोटवानी, डॉ. पूजा सोनवानी, डॉ. अजय, डॉ. वैष्णवी डॉ. कमलजीत बासन सहित अन्य स्टाफ सदस्य उपस्थित रहे। चिकित्सा शिक्षा की शुरुआत मानव शरीर के प्रति सम्मान और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से होती है। कैडेवर के अध्ययन से विद्यार्थियों को शरीर की संरचना को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिलता है, जो उनके चिकित्सा ज्ञान की मजबूत नींव तैयार करता है। यह अनुभव विद्यार्थियों में चिकित्सकीय नैतिकता, जिम्मेदारी और संवेदनशीलता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। समारोह का उद्देश्य विद्यार्थियों में सम्मान, कृतज्ञता, मानवीय संवेदनशीलता एवं चिकित्सकीय उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना था। समारोह का वातावरण गरिमापूर्ण एवं भावपूर्ण रहा। विद्यार्थियों ने कैडेवरिक शपथ के मूल्यों को अपने चिकित्सा जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लिया।
मेडिकल छात्रों के प्रथम शिक्षक के सामान है शव
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