बिलासपुर। डॉ. सीवी रमन विश्वविद्यालय के विश्वरंग 2026 के तहत पटना संग्रहालय में भारतीय कला, संस्कृति, साहित्य और ज्ञान परंपरा को लेकर विभिन्न सत्रों में विचार-विमर्श हुआ। आयोजन में भारतीय सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने और नई पीढ़ी को इससे जोडऩे पर जोर दिया गया। वरिष्ठ विचारक एवं पूर्व राजनयिक पवन के. वर्मा ने कहा कि भारतीय संस्कृति, भाषा और ज्ञान परंपरा का प्रभाव दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों में बिना किसी राजनीतिक या सैन्य दबाव के स्वाभाविक रूप से पहुंचा। रामायण, गीता और महाभारत सहित भारतीय साहित्य का प्रभाव आज भी अनेक देशों में दिखाई देता है। उन्होंने भारतीय दर्शन और संस्कृत साहित्य के व्यापक अनुवाद के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थान की जरूरत बताई। विश्वरंग के निदेशक डॉ. संतोष चौबे ने कहा कि हिंदी और भारतीय भाषाओं को वैश्विक मंच देने से शुरू हुई विश्वरंग की यात्रा अब 75 देशों तक पहुंच चुकी है। उन्होंने बताया कि आयोजन अब भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक चेतना पर व्यापक संवाद का मंच बन गया है। कार्यक्रम में रवीन्द्रनाथ टैगोर की कलात्मक दृष्टि पर भी चर्चा हुई। वरिष्ठ चित्रकार अशोक भौमिक ने कहा कि टैगोर की चित्रकला ने भारतीय कलाकारों को सृजन की स्वतंत्रता दी। इसके अलावा समकालीन कला में कला संगठनों की भूमिका पर भी मंथन हुआ। पटना संग्रहालय में टैगोर के चित्रों की प्रदर्शनी और ‘गरीबनवाज’ कहानी का पाठ भी आकर्षण का केंद्र रहा।
भारतीय संस्कृति, भाषा और ज्ञान परंपरा का प्रभाव कई देशों में तक पहुंचा
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