बिलासपुर। मन की उलझनों और जीवन की चुनौतियों के बीच आत्मिक शांति पाने के लिए परमात्मा से संबंध जोडऩा जरूरी है। इसके लिए किसी विशेष विधि या आडंबर की नहीं, बल्कि सच्चे भाव और सहज स्मृति की आवश्यकता है। राजयोग शिक्षिका बीके गायत्री दीदी ने शिव-अनुराग भवन, राजकिशोर नगर में आयोजित सात दिवसीय राजयोग ध्यान शिविर में यह बात कही। उन्होंने बताया कि राजयोग ध्यान का अर्थ विचारों को पूरी तरह रोकना नहीं है। आंखें खुली रखकर भी परमात्मा को याद करते हुए उनसे अपने मन की बातें साझा की जा सकती हैं। इस अभ्यास को उन्होंने ‘रूह-रिहान’ यानी आत्मिक बातचीत के रूप में समझाया। इससे व्यक्ति अपनी चिंताओं और भावनाओं को समझकर सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित कर सकता है। बीके गायत्री दीदी ने कहा कि परमात्मा को याचक बनकर पुकारने के बजाय उनकी संतान के रूप में उनसे संबंध जोडऩा चाहिए। परिचय, संबंध, स्नेह और प्राप्ति परमात्मा की याद के चार आधार हैं। उन्होंने प्रहलाद और मीराबाई के प्रसंगों के जरिए अटूट विश्वास, निष्कपट भक्ति और सभी के प्रति शुभभावना रखने का संदेश दिया। उनके अनुसार, संकट के समय परमात्मा पर विश्वास व्यक्ति को हिम्मत और संबल देता है।
आंखें खुली रखकर भी कर सकते हैं राजयोग ध्यान
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