बिलासपुर। आध्यात्मिक जीवन में आगे बढऩे के लिए स्वयं संतुष्ट रहना और दूसरों को संतुष्ट रखना सबसे बड़ी विशेषता है। परमात्मा का पास विद ऑनर प्राप्त करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को संतुष्टता रूपी पासपोर्ट धारण करना आवश्यक है। यह बातें टिकरापारा स्थित प्रभु दर्शन भवन में विशेष सत्संग और भोग कार्यक्रम के दौरान बीके मंजू दीदी ने कहा। उन्होंने कहा कि संगठन में जो भी सेवा मिले, उसे खुशी और समर्पण के साथ स्वीकार करना चाहिए। साथ ही आज समय की आवश्यकता है कि रहमदिल बनकर निराश और थकी हुई आत्माओं को सहारा दिया जाए। राजयोग और सकारात्मक संवाद के माध्यम से अनेक लोगों के जीवन में नई आशा का संचार किया जा सकता है। मुरली के मुख्य बिंदुओं पर प्रकाश डालते हुए बीके मंजू दीदी ने कहा कि प्रत्येक ब्रह्माकुमार-ब्रह्माकुमारी को परमात्मा का सच्चा संदेशवाहक बनकर लोगों तक पावन जीवन और परमधाम का संदेश पहुंचाना है। उन्होंने बाहरी दिखावे और फैशन की अपेक्षा आत्मिक गुणों एवं प्राकृतिक सुंदरता को अपनाने की प्रेरणा दी। दीदी ने कहा कि सच्चे दिल से परमात्मा को याद करने वाले को उनकी दुआएं सहज प्राप्त होती हैं। ऐसे व्यक्ति के संकल्प शक्तिशाली बनते हैं और वह अपने श्रेष्ठ वाइब्रेशन्स से समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है। अंत में सभी ने विश्व शांति एवं आत्मकल्याण के लिए सामूहिक राजयोग का अभ्यास किया।
संतुष्टता और रहमदिली सच्चे आध्यात्मिक जीवन की पहचान: मंजू दीदी
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