बिलासपुर। टेलीफोन एक्सचेंज रोड स्थित राजयोग भवन में आयोजित आध्यात्मिक ज्ञान कार्यक्रम के दौरान अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय आबू राज के ज्ञान सरोवर से पधारे वरिष्ठ राजयोग प्रशिक्षक बीके गोविंद भाई ने आध्यात्मिक जीवन, आत्मबल और सकारात्मक सोच पर प्रेरणादायी विचार व्यक्त किए। उन्होंने अपने संबोधन में बीके गोविंद भाई ने कहा कि आज हर व्यक्ति सुख, शांति और खुशी की तलाश में है। लोग भौतिक सुविधाएं तो प्राप्त कर रहे हैं, लेकिन मन की शांति उनसे नहीं मिलती। वास्तविक सुख तब मिलता है जब मनुष्य अपने वास्तविक स्वरूप अर्थात आत्मा को पहचानकर परमात्मा से अपना संबंध जोड़ता है। ईश्वर की याद मन को स्थिर बनाती है और जीवन में आत्मविश्वास, धैर्य तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। उन्होंने कहा कि दुनिया के अनेक देशों से लोग आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने के लिए आते हैं, लेकिन सबसे बड़ा आश्चर्य यह है कि स्वयं परमात्मा मानवता का मार्गदर्शन करने के लिए इस धरती पर ज्ञान का प्रकाश देते हैं। यही ईश्वर का अपने बच्चों के प्रति असीम प्रेम है। उन्होंने वर्तमान समय की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज तनाव, चिंता, क्रोध और असुरक्षा जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। ऐसे समय में प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन कुछ समय मौन और ध्यान का अभ्यास करना चाहिए। इससे मानसिक शक्ति बढ़ती है, निर्णय लेने की क्षमता विकसित होती है और जीवन में संतुलन बना रहता है। उन्होंने प्रात:काल के समय को विशेष महत्व देते हुए कहा कि सुबह का शांत वातावरण ध्यान और आत्मचिंतन के लिए सबसे उपयुक्त होता है। दिन की शुरुआत यदि कुछ मिनट ईश्वर की याद, सकारात्मक विचार और आत्मनिरीक्षण से की जाए, तो पूरा दिन उत्साह, शांति और ऊर्जा से भर जाता है। प्रतिदिन आत्मचिंतन कर, अपनी किसी एक कमी को चुनकर उसे सुधारे तथा दिन के अंत में स्वयं का मूल्यांकन अवश्य करें। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे सकारात्मक परिवर्तन ही आगे चलकर व्यक्तित्व को महान बनाते हैं। कार्यक्रम के अंत में सेवाकेंद्र संचालिका बीके स्वाति दीदी ने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में मानसिक शांति सबसे बड़ी आवश्यकता बन गई है। राजयोग मेडिटेशन व्यक्ति को स्वयं से जोड़ता है, तनाव कम करता है और जीवन को सकारात्मक दिशा प्रदान करता है। उन्होंने यह भी कहा कि आध्यात्मिक ज्ञान का नियमित अध्ययन जीवन को सही दिशा देता है। इससे व्यक्ति अपने दोषों को पहचानकर उन्हें दूर करने का प्रयास करता है और उसके भीतर धैर्य, विनम्रता, प्रेम, सहनशीलता और सहयोग जैसे श्रेष्ठ गुण विकसित होते हैं।
परमात्मा से जुडऩे पर जीवन में मिलता है सच्चा सुख और शांति: बीके गोविंद भाई
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