बिलासपुर। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के महत्वपूर्ण रेल मार्गों पर यात्री और माल परिवहन को नई रफ्तार मिलने वाली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे की दो अहम मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें कटनी-पेंड्रा रोड चौथी लाइन और बिलासपुर (उसलापुर)-पेंड्रा रोड तीसरी लाइन शामिल हैं। दोनों परियोजनाओं की कुल लंबाई 288 किलोमीटर और अनुमानित लागत 4,254 करोड़ रुपए है। रेल मंत्रालय के अनुसार इन परियोजनाओं के पूरा होने से बिलासपुर सहित छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के कई प्रमुख क्षेत्रों में रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ेगी। अतिरिक्त रेल लाइन उपलब्ध होने से मौजूदा मार्ग पर ट्रेनों का दबाव कम होगा और यात्री तथा मालगाडिय़ों के संचालन को अधिक सुचारु बनाने में मदद मिलेगी। इससे उत्तर भारत की ओर जाने वाली ट्रेनों के परिचालन में भी सुविधा बढऩे की संभावना है। कटनी-पेंड्रा रोड चौथी लाइन परियोजना 201 किलोमीटर लंबी होगी। इसके निर्माण पर करीब 2,975 करोड़ रुपए खर्च होंगे। परियोजना से प्रतिवर्ष लगभग 322 करोड़ रुपए की लॉजिस्टिक लागत बचत का अनुमान है। साथ ही करीब 14.42 करोड़ किलोग्राम कार्बन उत्सर्जन में कमी आने की संभावना जताई गई है। इस परियोजना से लगभग 68 लाख मानव-दिवस रोजगार सृजन की संभावना है। रेल संपर्क बेहतर होने से अमरकंटक और बांधवगढ़ जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंच भी आसान होगी। वहीं बिलासपुर (उसलापुर)-पेंड्रा रोड तीसरी लाइन की लंबाई 87 किलोमीटर होगी। इस परियोजना की अनुमानित लागत 1,279 करोड़ रुपए है। इसके पूरा होने पर करीब 96.2 करोड़ रुपए की वार्षिक लॉजिस्टिक लागत बचत और लगभग 4.3 करोड़ किलोग्राम कार्बन उत्सर्जन में कमी का अनुमान है। परियोजना से करीब 30 लाख मानव-दिवस रोजगार के अवसर भी सृजित होने की संभावना है। इन दोनों परियोजनाओं का असर बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग और रायगढ़ समेत छत्तीसगढ़ के प्रमुख शहरों के अलावा मध्य प्रदेश के अनूपपुर और शहडोल क्षेत्रों पर पड़ेगा। रेल लाइन क्षमता बढऩे से भविष्य में अतिरिक्त ट्रेनों के संचालन की संभावनाएं भी मजबूत होंगी। इससे यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी और अपेक्षाकृत सुगम यात्रा का लाभ मिल सकेगा। परियोजनाओं का लाभ केवल यात्री परिवहन तक सीमित नहीं रहेगा। बेहतर रेल आधारभूत संरचना से उद्योगों और व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलने, माल ढुलाई की क्षमता बढऩे तथा परिवहन व्यवस्था अधिक प्रभावी होने की उम्मीद है। साथ ही अचानकमार, अमरकंटक, खुटाघाट, मल्हार और रतनपुर जैसे पर्यटन स्थलों को बेहतर रेल संपर्क मिलने से पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है। कुल मिलाकर दोनों मल्टीट्रैकिंग परियोजनाएं दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के लिए आधारभूत संरचना विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इनके पूरा होने से छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के विभिन्न शहरों का उत्तर भारत से रेल संपर्क और मजबूत होगा तथा क्षेत्र में यात्री सुविधा, व्यापार, उद्योग, पर्यटन और रोजगार के नए अवसरों को गति मिलने की उम्मीद है।
बिलासपुर से उत्तर भारत तक रेल कनेक्टिविटी होगी मजबूत
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