बिलासपुर। भारतीय जनजातीय कला की समृद्ध परंपरा से नई पीढ़ी को परिचित कराने के उद्देश्य से दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे सांस्कृतिक संघ ने 11 अक्टूबर को रेल क्लब, बिलासपुर में एक दिवसीय वारली आर्ट वर्कशॉप आयोजित की। इसमें पांच वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों और वयस्कों ने भाग लेकर पारंपरिक चित्रकला की तकनीक सीखी। कार्यशाला के माध्यम से प्रतिभागियों को अपनी रचनात्मकता प्रदर्शित करने का अवसर मिला।
कार्यक्रम की अध्यक्षता सांस्कृतिक संघ के अध्यक्ष एवं प्रधान मुख्य सामग्री प्रबंधक अरविंद मेश्राम ने की। इस अवसर पर संघ की उपाध्यक्ष शिवरंजनी पी. वर्मा, सचिव निकिता अग्रवाल, पारिजात सतपथी, प्राची मित्तल और अदिति दुबे सहित रेलवे के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यशाला में प्रतिभागियों ने वारली कला की विशिष्ट शैली में आकर्षक चित्र तैयार किए। प्रदर्शनी में प्रकृति, ग्रामीण जीवन, सामाजिक गतिविधियों और जनजातीय परंपराओं से जुड़े दृश्य देखने को मिले। ज्यामितीय आकृतियों के माध्यम से बनाई गई कलाकृतियों ने अतिथियों और दर्शकों को आकर्षित किया। कार्यक्रम में सेक्रो अध्यक्षा मीनाक्षी शर्मा मुख्य अतिथि और सेक्रो सचिव वैशाली भटनागर विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुईं। उन्होंने प्रदर्शनी का अवलोकन कर प्रतिभागियों के प्रयासों की सराहना की। कार्यक्रम के दौरान वारली कला प्रशिक्षक अरुण यादव, राज साहू और उनकी टीम को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। वहीं, कार्यशाला में शामिल सभी प्रतिभागियों को प्रशस्ति-पत्र प्रदान किए गए। प्रशिक्षण में वारली चित्रकला की पारंपरिक शैली, ज्यामितीय आकृतियों के प्रयोग और चित्रों के जरिए जनजातीय जीवन को दर्शाने की जानकारी दी गई। आयोजकों ने कहा कि ऐसे आयोजन लोककलाओं के संरक्षण के साथ बच्चों और युवाओं में रचनात्मकता बढ़ाने तथा सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
वारली चित्रकला के जरिए जनजातीय संस्कृति से रूबरू हुए बच्चे
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