• Tue. Nov 3rd, 2026

एटीआर में वन्यजीव देखने उमड़ी भीड़

1 0
Read Time:3 Minute, 51 Second

बिलासपुर। अचानकमार टाइगर रिजर्व का गेट 1 नवंबर से पर्यटकों के लिए खोल दिया गया है। पहले दिन पहले ही दिन पर्यटकों में खासा उत्साह रहा। कुल 138 सैलानियों ने जंगल सफारी का आनंद लिया। 11 जिप्सियों की बुकिंग हुई, वहीं बैगा रिसॉर्ट के तीन कमरे भी बुक रहे। अब पर्यटक यहां बाघों के दीदार के साथ मैकल पर्वतमाला की समृद्ध जैव विविधता को करीब से देख सकेंगे। दुसरे दिन सोमवार को भी भारी संख्या में पर्यटक पहुंचे। सफारी का आनंद लेते हुए जंगल का भ्रमण किया। केवची गेट खुलने से गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, मनेंद्रगढ़, अमरकंटक और जबलपुर से आने वाले पर्यटकों के लिए टाइगर रिजर्व में सफारी करना आसान होगा।अचानकमार टाइगर रिजर्व में जंगल सफारी के लिए जिप्सी, महारानी और योद्धा वाहनों की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इनके जरिए पर्यटक जंगल के प्राकृतिक नजारों, वन्यजीवों और जैव विविधता को करीब से देख सकेंगे। करीब 914.017 वर्ग किलोमीटर में फैला यह टाइगर रिजर्व अपनी समृद्ध वन संपदा और वन्यजीवों के लिए जाना जाता है। मैकल पर्वतमाला की वादियों में फैला अचानकमार टाइगर रिजर्व समृद्ध जैव विविधता के लिए जाना जाता है। यहां 18 से अधिक बाघों के अलावा तेंदुआ, गौर, भालू और हिरणों की मौजूदगी पर्यटकों को आकर्षित करती है। 400 से अधिक पक्षी प्रजातियां भी इस जंगल की खास पहचान हैं। एटीआर प्रबंधन ने सफारी के साथ पर्यटकों के ठहरने की व्यवस्था भी की है। शिवतराई स्थित बैगा रिसॉर्ट में 14 सामान्य और 4 प्रीमियम कमरे उपलब्ध हैं। यहां पर्यटक जंगल के प्राकृतिक वातावरण के बीच ठहरने का अनुभव ले सकेंगे। अचानकमार टाइगर रिजर्व में सफारी और पर्यटन से जुड़ी जानकारी के लिए संपर्क नंबर जारी किया गया है। पर्यटक सफारी बुकिंग, प्रवेश और अन्य सुविधाओं की जानकारी लेकर अपनी यात्रा की योजना बना सकते हैं। 1 नवंबर से पर्यटन शुरू होने के साथ ही यहां पर्यटकों की आवाजाही बढऩे की उम्मीद है। जिप्सी (6 सीटर) का शुल्क 3,500 रुपए, महारानी (8 सीटर) का 5,000 रुपए और योद्धा (9 सीटर) का 5,500 रुपए प्रति राउंड है। बैगा रिसॉर्ट में एक कमरे का शुल्क 3,500 रुपए है। पर्यटक ऑनलाइन बुकिंग करवा रहे हैं। जिससे एटीआर आने वाले लोगों को संपुर्ण सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। नए प्रवेश द्वार और सफारी मार्ग का उद्देश्य केवल पर्यटकों की आवाजाही आसान बनाना नहीं है, बल्कि जंगल से जुड़े गांवों में आजीविका के नए अवसर पैदा करना भी है। सफारी वाहनों के संचालन, स्थानीय गाइड, रिसॉर्ट में ठहरने, खानपान और अन्य आतिथ्य सेवाओं के माध्यम से स्थानीय युवाओं को रोजगार मिल रहा है।

Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleepy
Sleepy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %
भूपेन्द्र पाण्डेय

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *