रायपुर। आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों के इलाज में अनियमितता बरतने वाले निजी अस्पतालों पर स्वास्थ्य विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। प्रदेश के 16 अस्पतालों का योजना के तहत पंजीयन निरस्त कर दिया गया है। जांच के दायरे में आए 19 अस्पतालों में से 16 में गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं। इनमें मरीजों से अतिरिक्त रकम वसूलने, बिना जरूरत भर्ती करने और इलाज के पैकेज में गलत कोड दर्ज कर सरकार से अधिक भुगतान लेने जैसे मामले शामिल हैं। कार्रवाई की जद में सबसे ज्यादा रायपुर के आठ अस्पताल आए हैं। स्वास्थ्य विभाग की जांच में सामने आया कि कुछ अस्पतालों ने आयुष्मान योजना को कमाई का जरिया बना लिया था। मरीजों को एजेंटों के माध्यम से अस्पताल बुलाया जाता था। इसके बाद इलाज के नाम पर निर्धारित राशि से अधिक पैसे वसूले जाते थे। जांच में 11 अस्पतालों में अतिरिक्त वसूली, सात में अनावश्यक भर्ती और पांच में गलत पैकेज कोडिंग की पुष्टि हुई। वहीं, छह अस्पतालों में एजेंटों के जरिए मरीज लाने और दो में फर्जी दस्तावेज तैयार करने की गड़बड़ी मिली। रायपुर के श्री अनंत साई, एसके केयर, श्री महावीर, श्रीनिवास, वरदान, सुयश इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, हेरिटेज और श्री रावतपुरा सरकार अस्पताल का पंजीयन निरस्त किया गया है। इनमें मरीजों से अतिरिक्त वसूली, एजेंटों के जरिए मरीज लाने, गलत पैकेज कोडिंग और फर्जी दस्तावेज जैसी अनियमितताएं सामने आईं। दुर्ग के पल्स अस्पताल और श्री शंकराचार्य इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस, कोंडागांव के नेताम अस्पताल एवं इन्फर्टिलिटी सेंटर, कोरबा के हरि कृष्णा केयर अस्पताल, बस्तर के स्वामी चंद्रशेखरानंद अस्पताल, कबीरधाम के जय जगन्नाथ हेल्थकेयर तथा बिलासपुर के अशोक प्रसूति मंदिर और केयर एन क्योर मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल पर भी कार्रवाई की गई है। जांच के दौरान तीन अस्पतालों में कोई बड़ी गड़बड़ी नहीं मिली। इनमें बिलासपुर का मेहता चिल्ड्रन नर्सिंग होम, रायपुर का विजन सेंटर आई हॉस्पिटल और सरगुजा का डीएचटी अस्पताल शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त संचालक इंद्रजीत बर्मन के अनुसार, फिलहाल 16 अस्पतालों पर कार्रवाई आयुष्मान योजना के पंजीयन को लेकर की गई है। नर्सिंग होम एक्ट के तहत अनियमितताओं की जांच के लिए अलग टीम गठित की गई है। इस जांच में अस्पतालों के पंजीयन, संचालन, आवश्यक सुविधाओं, स्टाफ और मरीजों को दी जा रही चिकित्सा सेवाओं के निर्धारित मानकों की पड़ताल होगी। गंभीर खामियां मिलने पर अस्पतालों का पंजीयन निरस्त करने की कार्रवाई भी हो सकती है।
आयुष्मान योजना में मरीजों के इलाज के नाम पर खेल
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