बिलासपुर। जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की शुरुआत स्वयं से होती है। दूसरों की कमियां तलाशने के बजाय अपनी कमजोरियों को पहचानकर उन्हें दूर करने का प्रयास करना चाहिए। समय का सदुपयोग, मन की एकाग्रता और दृढ़ संकल्प ऐसे सूत्र हैं, जिनसे कठिन लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं। यह विचार ब्रह्माकुमारीज के मुख्यालय आबू राज के ज्ञानामृत प्रेस विभाग से आए बीके अर्जुन भाई ने राजकिशोर नगर स्थित सेवाकेंद्र में आयोजित विशेष अनुभव सत्र में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि समय की कदर करने वाला व्यक्ति ही जीवन में आगे बढ़ता है। अमृतवेला में एक निश्चित समय और स्थान पर बैठकर श्रेष्ठ संकल्प का नियमित अभ्यास करने से मन की एकाग्रता और इच्छाशक्ति मजबूत होती है। नियमित मुरली श्रवण और योगाभ्यास को दिनचर्या में शामिल करने की भी उन्होंने प्रेरणा दी। सेवा और विनम्रता का महत्व बताते हुए अर्जुन भाई ने कहा कि झाड़ू-पोछा और बर्तन साफ करने जैसे छोटे कार्य भी अहंकार को समाप्त करने का माध्यम बन सकते हैं। परमात्मा को अपना साथी बनाकर चलने से विपरीत परिस्थितियों में भी मनोबल बना रहता है। अपने आध्यात्मिक जीवन के अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 1978 में महज 10-11 वर्ष की उम्र में वे ईश्वरीय ज्ञान से जुड़े थे। इस मार्ग पर उन्हें पारिवारिक विरोध और कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन दृढ़ निश्चय के कारण वे आगे बढ़ते रहे। उन्होंने वरिष्ठ दादियों से जुड़े प्रेरक संस्मरण भी सुनाए और विश्वास एवं साहस का महत्व बताया। कार्यक्रम में चित्र प्रदर्शनी और यज्ञ इतिहास पर आधारित प्रश्नोत्तरी आयोजित की गई। इसके बाद बीके अर्जुन भाई, सेवाकेंद्र प्रभारी बीके मंजू दीदी, बीके रूपा दीदी सहित उपस्थित भाई-बहनों ने दीप प्रज्ज्वलित कर दीपावली की शुरुआत की। सामूहिक योगाभ्यास और ईश्वरीय भोग के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।
समय का सदुपयोग सफलता की पहली शर्त: बीके अर्जुन भाई
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