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पांच दिन से डीईओ का प्रभार खाली, फाइलें अटकीं, व्यवस्था बेपटरी

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बिलासपुर। प्रदेश का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण शिक्षा विभाग इन दिनों बिलासपुर में गंभीर प्रशासनिक संकट से गुजर रहा है। जिस विभाग पर हजारों विद्यार्थियों के भविष्य की जिम्मेदारी है, वही विभाग पिछले पांच दिनों से बिना जिला शिक्षा अधिकारी के संचालित हो रहा है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी रामेश्वर जायसवाल को अपने मूल विद्यालय लौटना पड़ा, लेकिन उनके जाने के बाद अब तक न तो नए डीईओ की नियुक्ति हुई है और न ही किसी अधिकारी को औपचारिक रूप से प्रभार सौंपा गया है। इस स्थिति के कारण जिला शिक्षा कार्यालय में प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो रहा है। जानकारी के अनुसार कई महत्वपूर्ण शाखाओं में फाइलों का निपटारा रुका हुआ है। समग्र शिक्षा, छात्रवृत्ति, स्थापना सहित अन्य शाखाओं में लंबित मामलों पर निर्णय नहीं हो पा रहे हैं। शिक्षक, कर्मचारी और आम नागरिक रोजाना कार्यालय पहुंच रहे हैं, लेकिन निर्णय लेने वाला सक्षम अधिकारी मौजूद नहीं होने से उन्हें निराश लौटना पड़ रहा है। जिला शिक्षा विभाग पिछले करीब डेढ़ वर्ष से लगातार विवादों के केंद्र में बना हुआ है। पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे के कार्यकाल में निजी स्कूलों को संरक्षण, युक्तियुक्तिकरण, अनुकंपा नियुक्ति सहित कई मामलों में शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद रामेश्वर जायसवाल की नियुक्ति को वरिष्ठ अधिकारियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी, जहां अदालत ने नियुक्ति निरस्त करते हुए उन्हें मूल पद पर लौटने का आदेश दिया। प्रशासनिक नेतृत्व के अभाव का असर निजी स्कूलों पर निगरानी में भी दिखाई दे रहा है। आरोप है कि शासन और जिला प्रशासन के निर्देशों के बावजूद कई निजी स्कूल सीबीएसई के नियमों का उल्लंघन कर अभिभावकों पर महंगी किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने का दबाव बना रहे हैं। वहीं सीबीएसई मान्यता, फर्जी पंजीयन, पूरक परीक्षा तथा पांचवीं-आठवीं से जुड़ी शिकायतों की जांच भी लंबित बताई जा रही है। सूत्रों का कहना है कि कई वरिष्ठ अधिकारी औपचारिक प्रभार नहीं मिलने के कारण वित्तीय और प्रशासनिक निर्णय लेने से बच रहे हैं। जिला शिक्षा अधिकारी के अधिकारों और डीडी पावर को लेकर भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है, जिससे कार्यालयीन कार्य प्रभावित हो रहे हैं। जैसे बड़े जिले में कई दिनों तक जिला शिक्षा अधिकारी का पद खाली रहने से राज्य शासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। शिक्षा विभाग में नेतृत्व का अभाव न केवल प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावित कर रहा है, बल्कि हजारों विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों के हित भी इससे प्रभावित हो रहे हैं।

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भूपेन्द्र पाण्डेय

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