• Mon. Oct 26th, 2026

33 वर्षों से कला और साहित्य की परंपरा को सहेज रहा बिलासा कला मंच

0 0
Read Time:2 Minute, 31 Second

बिलासपुर। साहित्य, संगीत और संस्कृति के संगम के रूप में बिलासा कला मंच का 33वां शरद पूर्णिमा उत्सव उल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में अंचल के साहित्यकारों, कवियों और संगीतकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से समां बांधा। भजनों की मधुर धुनों और काव्य पाठ के बीच श्रोताओं ने शरद पूर्णिमा की सांस्कृतिक परंपरा का आनंद लिया। चांदनी रात में रखी गई पारंपरिक खीर का प्रसाद वितरण उत्सव का विशेष आकर्षण रहा।

मंच के संरक्षक चंद्रप्रकाश देवरस, वरिष्ठ साहित्यकार सतीश जायसवाल और डॉ. अजय पाठक के आतिथ्य में आयोजित कार्यक्रम में संस्थापक डॉ. सोमनाथ यादव और अध्यक्ष महेश श्रीवास ने कहा कि बिलासा कला मंच पिछले 33 वर्षों से प्रकृति, साहित्य और कला के जुड़ाव को सहेजने का प्रयास कर रहा है।

कार्यक्रम की शुरुआत रश्मि गुप्ता, राजेंद्र सूर्यवंशी, मनोहर दास मानिकपुरी और ओम शंकर लिबर्टी के भजनों से हुई। इसके बाद शत्रुघ्न जैसवानी, डॉ. सोमनाथ मुखर्जी, डॉ. सुधाकर बिबे, सनत तिवारी, राकेश श्रीवास, दिनेश्वर जाधव और डॉ. जीडी पटेल ने काव्य पाठ कर श्रोताओं को भावविभोर किया। महिलाओं के लिए हाऊजी का आयोजन भी किया गया।

कार्यक्रम का संचालन महेश श्रीवास ने किया। संयोजक रामेश्वर गुप्ता ने आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर अरविंद शर्मा, अश्वनी पांडेय, अनूप श्रीवास, सुनील तिवारी, डॉ. नंद कुमार लास्कर, नरेंद्र कौशिक, बद्री केवट, उमेद्र यादव, जलेश्वर यादव, रामायण सूर्यवंशी, गोपाल यादव, शीतल पाटनवार, दिनेश लसहे और दिलीप कौशिक सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार एवं कलाप्रेमी उपस्थित रहे।

Happy
Happy
0 %
Sad
Sad
0 %
Excited
Excited
0 %
Sleepy
Sleepy
0 %
Angry
Angry
0 %
Surprise
Surprise
0 %
भूपेन्द्र पाण्डेय

Average Rating

5 Star
0%
4 Star
0%
3 Star
0%
2 Star
0%
1 Star
0%

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *