
बिलासपुर। जन्म लेते ही सांस लेने में परेशानी और गंभीर हालत से जूझ रहे एक नवजात को करीब एक महीने के उपचार के बाद नई जिंदगी मिली। लोरमी निवासी गौसिया परवीन के नवजात को जन्म के तुरंत बाद सांस लेने में गंभीर दिक्कत होने पर श्री शिशु भवन हॉस्पिटल लाया गया था। जांच में बच्चे के दोनों नासिका मार्ग जन्म से बंद पाए गए। चिकित्सकीय टीम ने तत्काल उपचार शुरू किया और करीब एक सप्ताह तक वेंटिलेटर सपोर्ट देने के बाद जटिल सर्जरी की। नवजात का जन्म 3 जुलाई 2026 को हुआ था। जन्म के बाद उसकी सांस लेने की स्थिति लगातार बिगडऩे लगी। दोनों नासिका मार्ग बंद होने के कारण शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही थी। गंभीर स्थिति को देखते हुए परिजन उसी दिन बच्चे को बिलासपुर लेकर पहुंचे। डॉ. श्रीकांत गिरी के नेतृत्व में चिकित्सकीय टीम ने सबसे पहले नवजात की सांस और ऑक्सीजन स्तर को नियंत्रित करने पर ध्यान दिया। गंभीर हालत के कारण उसे लगभग सात दिनों तक वेंटिलेटर पर रखा गया। लगातार निगरानी के बाद जब स्थिति सर्जरी के लिए अनुकूल हुई तो विशेषज्ञों ने बंद नासिका मार्ग को खोलने के लिए जटिल सर्जिकल उपचार किया। डॉक्टरों के अनुसार बिलेट्रल कोएनल एट्रेसिया एक दुर्लभ जन्मजात स्थिति है, जिसमें नाक के दोनों पिछले वायुमार्ग जन्म से ही बंद रहते हैं। नवजात शुरुआती दिनों में मुख्य रूप से नाक से सांस लेते हैं, इसलिए दोनों मार्ग बंद होने पर गंभीर श्वसन संकट और ऑक्सीजन की कमी हो सकती है। समय पर उपचार नहीं मिलने पर स्थिति जानलेवा भी बन सकती है। सर्जरी के बाद नवजात बच्चे की स्थिति में लगातार सुधार हुआ। 8 अगस्त को नवजात को स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। उपचार में डॉ. श्रीकांत गिरी, डॉ. रवि द्विवेदी, डॉ. अंकित ठकराल, डॉ. प्रणव अंधारे, डॉ. विशाल मांझी और डॉ. मोनिका जायसवाल सहित चिकित्सकीय टीम की भूमिका रही। अस्पताल प्रबंधक नवल वर्मा के मार्गदर्शन में नर्सिंग और सपोर्ट स्टाफ ने भी लगातार बच्चे की देखभाल की। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार नवजात को गंभीर अवस्था से स्थिर करने, सर्जरी करने और उसके बाद स्वस्थ होने तक पहुंचाने में नियोनेटल, सर्जिकल, एनेस्थीसिया, नर्सिंग और सपोर्ट टीम के बीच बेहतर समन्वय महत्वपूर्ण रहा। करीब एक महीने बाद जब माता-पिता को अपना बच्चा स्वस्थ अवस्था में गोद में मिला तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। भावुक माता-पिता ने चिकित्सकों और अस्पताल की पूरी टीम का आभार जताया। गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचे नवजात का स्वस्थ होकर घर लौटना समय पर उपचार, विशेषज्ञ चिकित्सा, सतत निगरानी और टीमवर्क का उदाहरण बना।