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अव्यवस्थित मुरूम आपूर्ति पर कलेक्टर की चिंता, सुनियोजित व्यवस्था के निर्देश निर्धारित स्थानों से ही लाएं निर्माण सामग्री, अवैध परिवहन पर होगी कार्रवाई

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बिलासपुर :—  कलेक्टर संजय अग्रवाल ने जिले में चल रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए सभी निर्माण एजेंसियों की संयुक्त समीक्षा बैठक ली। बैठक में जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल सहित राज्य सरकार की विभिन्न निर्माण एजेंसियों, रेलवे, एनटीपीसी और एनएचएआई के अधिकारी उपस्थित रहे। कलेक्टर ने निर्माण कार्यों में उपयोग होने वाली मिट्टी-मुरूम की अव्यवस्थित व्यवस्था पर चिंता जताते हुए इसे सुनियोजित ढंग से उपलब्ध कराने और तालाब गहरीकरण से जोड़ने की नई पहल की घोषणा की।

 

कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कहा कि जिले में अधिकांश निर्माण कार्यों में मिट्टी और मुरूम की आवश्यकता होती है, जिसे ठेकेदार वर्तमान में असंगठित तरीके से विभिन्न स्थानों से जुटाते हैं। इस व्यवस्था में सुधार लाने के लिए अब एक सुव्यवस्थित योजना तैयार की जाएगी, जिससे आवश्यक सामग्री निर्धारित स्थलों से ही उपलब्ध कराई जा सके।

 

उन्होंने बताया कि गर्मी के मौसम में जिले के अनेक तालाब सूख चुके हैं और अधिकांश तालाब उथले हैं। ऐसे में इन तालाबों के गहरीकरण से प्राप्त मिट्टी और मुरूम का उपयोग निर्माण कार्यों में किया जा सकता है। इससे एक ओर निर्माण कार्यों को सामग्री उपलब्ध होगी, वहीं दूसरी ओर तालाबों की जलग्रहण क्षमता बढ़ेगी और जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। इस दिशा में आगामी डेढ़ से दो माह में जिले के 200 तालाबों के गहरीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

 

कलेक्टर ने निर्देश दिए कि गहरीकरण कार्यों के लिए ठेकेदार मशीनों का उपयोग कर सकते हैं, जिसके लिए संबंधित पंचायतों से विधिवत प्रस्ताव पारित कराकर अनुमति दी जाएगी। उन्होंने सब इंजीनियरों को विशेष रूप से निर्देशित किया कि वे यह सुनिश्चित करें कि ठेकेदार निर्धारित स्थानों से ही मिट्टी-मुरूम ला रहे हैं। अनियमित या अवैध परिवहन पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।बैठक में कलेक्टर ने पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर देते हुए ठेकेदारों से अपील की कि वे तालाबों के मेड़ों पर वृक्षारोपण करें और इसे अपने सीएसआर दायित्व के रूप में लें। उन्होंने पीपल, बरगद और आम जैसे बड़े एवं धार्मिक महत्व वाले वृक्ष लगाने की सलाह दी तथा स्थानीय जनता की सहभागिता से इस अभियान को सफल बनाने पर बल दिया।

 

इसके साथ ही कलेक्टर ने सभी निर्माण कार्यों को एग्रीमेंट के अनुरूप तय समयसीमा और गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सरकारी और निजी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता में अंतर नहीं होना चाहिए। योजनाओं की स्वीकृति में लंबा समय लगता है और यह जनता के टैक्स का पैसा होता है, इसलिए प्रत्येक कार्य जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ किया जाना चाहिए। उन्होंने बसाहट क्षेत्रों के आसपास भूमि के बेहतर उपयोग, भवनों में पार्किंग की समुचित व्यवस्था तथा योजनाबद्ध विकास पर भी जोर दिया। कलेक्टर ने कहा कि अधिकारी और ठेकेदार आपसी अनुभव साझा कर कार्यों की गुणवत्ता को और बेहतर बना सकते हैं। बैठक में सभी निर्माण विभागों के सब इंजीनियर से लेकर कार्यपालन अभियंता स्तर तक के अधिकारी उपस्थित रहे और विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई।

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भूपेन्द्र पाण्डेय

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